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This topic contains 0 replies, has 1 voice, and was last updated by  ashish adish 7 years, 3 months ago.

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    ashish adish
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    चल रहा हूँ मैँ,
    जिँदगी के रास्ते मेँ,
    सपने संजोये जो,
    बदलने हकीकत मेँ।

    हमसफर भी मिले,
    मुश्किलेँ राह आईँ,
    कुछ डर गए, वो थम गए, हम चलते रहे…चलते रहे।।

    ध्यान विचलित भी हुआ,
    पथ छोङने का मन हुआ,
    साथियोँ से हौसला मिला,
    मन फिर से उठ खङा हुआ।

    मंजिलेँ नजदीक आईँ,
    सपना सच होने को था,
    दिल को एक सुकून मिला,
    मैँ खुश हुआ..मैँ खुश हुआ।।

    मंजिल पास है,
    पर मन भटक रहा,
    दुनिया के शोर में,
    मन न अब संभल रहा।

    लाँघना है चुनौतियोँ को,
    जीत को ही पाना है,
    इरादा बुलंद है,
    बस चलते ही जाना है,
    चलते ही जाना है।।

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