रोना

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    जीवन कहाँ गुजारूं अपना
    पाऊं कहाँ पर जीवन ठौर,
    मरघट भी चिल्लाकर कहता
    मत आना तुम मेरी ओर.

    आज ढूंढते अश्क मज़ार,
    मौत स्वयं ही मौत मांगती,
    अभी अभी सज आई दुल्हन
    आज ही अपनी सौत मांगती

    आज मुझे रोने दो जी भर ,
    आँखे फोड आंसू पीकर ,
    सर खुद के कांधे पे रखकर
    आज मुझे रोने दो जी भर …

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