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About: siddhanathsingh

siddha Nath Singh Full Name: siddha Nath Singh

Details:
I am an engineer by training and sahitya premi by nature. I started writing when 16 years of age and have reached to the present level of proficiency till now. It is for the "kavya rasiks" to judge how far i have reached. "benoor nargis chaman mein deedavar ki talash mein hun-s.n.singh

Poems by siddhanathsingh

Date Title     Comments Views
13 Mar 2010 चलो कहीं दिल और लगाओ,उनको कब फुर्सत मिलती है ! 0 20
13 Mar 2010 चमन में आके तुम्हारी मिसाल देते हैं ! 2 21
12 Mar 2010 जब निकले वो शहर सजाने ! 0 25
12 Mar 2010 बादलों में ढंकी चांदनी ! 1 23
12 Mar 2010 हैं बहिरंतर क्षत विक्षत हम ! 5 20
12 Mar 2010 अंगरागों से चेहरे मले जा रहे ! 6 26
11 Mar 2010 अर्थ के अनर्थ देखिये ! 4 28
11 Mar 2010 नक्श नज़र आते जब तेरे चंदा की रानाई में ! 2 19
10 Mar 2010 यहाँ इंसान कठपुतली बने हैं ! 6 22
10 Mar 2010 गैर को प्यार कहाँ करते हैं ! 4 25
10 Mar 2010 मुल्क को चद्दर बना बैठे हैं लोग. 2 20
09 Mar 2010 खेल जीत का आगे ही है, जंग अभी है ज़ारी जी. 6 22
09 Mar 2010 न चाहत में देखी ख़ुशी आप ने 6 28
09 Mar 2010 अच्छी मजलिस में आये हम,स्वर गूंगे, श्रोता बहरे हैं. 7 29
08 Mar 2010 झुकता है आकाश, बढ़ा कर हाथ रौशनी बीनेंगे.! 6 24
08 Mar 2010 हालाते मुल्क पर ये भला तब्सिरा रहा ! 4 21
08 Mar 2010 कुछ दिल गुजिश्त अपनी बतानी शुरू करें ! 2 24
08 Mar 2010 मगर हम जुर्म की औरों पे तोहमत मढ़ नहीं पाए. 6 19
07 Mar 2010 गुलशन गुलशन घूम रहे जो सब तेरे दीवाने हैं. 6 23
07 Mar 2010 फ़क़त उम्र भर पापड बेले.! 4 18
07 Mar 2010 यूँ न चुटकी में कोई फ़न आये.! 6 18
06 Mar 2010 इंगितों से लरजायीं डोरियाँ किसी ने ! 4 23
06 Mar 2010 बजेंगे घने खूब थोथे चने ! 4 26
05 Mar 2010 सखी कैसा सिसकता है बरसती सांझ का पानी. ! 10 40
04 Mar 2010 आये ना घनश्याम सखी री ! 4 32
04 Mar 2010 सीता न सिर्फ सोन हिरन से छली गयी ! 6 29
04 Mar 2010 कुछ तो कीजे कि ये मौसम बदले.! 2 26
03 Mar 2010 आईना ले के हम सोचते रह गए.! 4 33
03 Mar 2010 हम न यूँ ही फ़क़त बदगुमां हो गए ! 4 33
03 Mar 2010 पर मिले सबसे टूट कर हम भी ! 4 35
02 Mar 2010 जोगीड़ा सारा रा रा ! 4 34
02 Mar 2010 होलियों में याद आते हैं, भौजियों को हाथ बबुआ के ! 2 26
01 Mar 2010 बता देंगे बातें चलो नैन कारे ! 6 32
28 Feb 2010 धर्मराज हैं द्यूतरत , रहे शकुनि सब जीत ! 2 38
27 Feb 2010 चला सजनी मूंदा अंखिया पिया अब न अइहें ! 0 29
27 Feb 2010 दर्पण अन्धराया एक रहा,वो भी गुगली से चार प्रभो. 2 31
27 Feb 2010 खुद से भी रहने लगे नाराज़ हम ! 4 34
27 Feb 2010 आईना देखते ही गए हम जो डर ! 2 24
26 Feb 2010 ज़ज्बातों के पौधे कोमल, मन की मिटटी को नम रखिये. 6 24
25 Feb 2010 झील में देखता आईना रात भर ! 2 32
25 Feb 2010 हक़ से लेकिन कोई गाफिल ना रहा ! 4 29
25 Feb 2010 क्या करेंगे तेरे प्यार की वो कदर ! 2 38
24 Feb 2010 दिल रख दिया क़दमों में ज़रो-माल न देखे ! 8 35
24 Feb 2010 कर रहे हैं बात सब तलवार से ! 16 40
24 Feb 2010 हम हुए भी तो क्यों फ़िज़ूल अलग ! 10 38
23 Feb 2010 गीत रचे उस गीतकार ने मैं गुनगुना रहा हूँ ! 4 33
23 Feb 2010 रुख्सारे गुल पे लाजिम है ताज़गी का आलम 6 25
22 Feb 2010 छल गए बहुरूपिये से क्षण.! 8 34
22 Feb 2010 उसके हाथों में हैं डोरियाँ,पुतलियाँ मग्न हैं नाच में ! 8 34
22 Feb 2010 हम थे चाहत के मुजरिम मगर,जुर्म ये भी न आया हमें ! 0 29
21 Feb 2010 छाया के गीत बहुत दीर्घ हुए जाते है 0 21
21 Feb 2010 भुज मृणालों में तुम्हारी बद्ध मैं खोया हुआ सा. 5 42
21 Feb 2010 जितने गुल खिलने थे अब तक, खिल लिए ! 6 30
20 Feb 2010 यहाँ तो फूल सब कुम्हला चुके हैं ! 9 38
19 Feb 2010 मिट्टी सबकी एक है सूरत भले अनेक. 14 42
19 Feb 2010 गुरुरे हुस्न तो कब कम हुआ है ! 4 31
19 Feb 2010 स्वर तुम्हारे नहीं पा सकी,गीतिका रह गयी मौन ही ! 6 29
18 Feb 2010 फिर भी क्यों हम पर नज़र होती नहीं! 8 39
18 Feb 2010 तुझको ऐ दिल अभी संभलना था ! 7 36
18 Feb 2010 रच दो जादू अँगुलियों से तन मेरा चन्दन हो जाए ! 7 33
17 Feb 2010 छोड़ कर इश्क का चलन प्यारे 10 28
17 Feb 2010 देख कर जेन नेक्स्ट को ऐसे रिदम की ताल में 4 26
16 Feb 2010 आप थे इस क़दर खूबसूरत कहाँ ! 3 37
16 Feb 2010 पिलाने का अजब ही ढब रखा है ! 3 27
15 Feb 2010 सतरें पड़ीं है फूल पे खुशबू के पांव से 2 33
15 Feb 2010 यही तो हासिल है ज़िन्दगी का लगा रहेगा ये जीना मरना ! 5 33
14 Feb 2010 रुदादे इश्क छोड़ कोई और बात कर ! 9 34
14 Feb 2010 सारे फ़िदा ए यार तो दुनिया में खो गए ! 4 22
13 Feb 2010 दुआ ये करो सब्र दिल को मिले,दिया रब ने यूँ भी मियां है बहुत 2 32
13 Feb 2010 डार्लिंग डार्लिंग रट रहे गलती मगर न दाल 4 32
13 Feb 2010 हमारे पांव थे शबनम के फूल फूल चले 2 25
12 Feb 2010 कहीं रहोगे मेरे दिल की जान लोगे तुम 8 37
12 Feb 2010 रस्मे उल्फत निभाई यूँ मैनें , चुप थे,क्या उसको बेवफा कहते ! 10 43
12 Feb 2010 हुस्न का है तेरे जवाब कहाँ ! 6 44
10 Feb 2010 कल पर रख दो सब मनुहारें,आज मेरा मन ठीक नहीं है ! 6 43
10 Feb 2010 रात के हामी हजारों हो गए,क्या करे सूरज बिचारा देखना ! 6 33
09 Feb 2010 अजब दोस्त एक आज हमको मिला है 10 58
09 Feb 2010 जो कि पुराने ज़ख्म कुरेदें,वो अफ़साने क्यों पढ़ते हो ! 2 46
08 Feb 2010 बदन के पोर अब भी रात भर अपने दहकते हैं ! 5 43
08 Feb 2010 बता तू ही अब इस पर किस तरह लिक्खूं ग़ज़ल प्यारे ! 20 53
07 Feb 2010 आस्तीनों में छुरी रख मुंह में रखना राम राम 4 37
06 Feb 2010 खिल उठीं आँखें तुम्हारी हैं कमल सी ! 0 35
06 Feb 2010 मेरी आँखों में विम्ब निहार,स्वयं पर सम्मोहित सी तुम ! 10 40
05 Feb 2010 गीत गुमनाम हैं गालियाँ पोपुलर,क्या कहें दोस्तों वक़्त के फेर हैं ! 0 49
05 Feb 2010 ग़म की शाम अँधेरी आई, यादों के जुगनू आये ! 4 36
05 Feb 2010 देह का दोहा हुआ संपूर्ण है, साँस करती साँस से संवाद है ! 2 42
04 Feb 2010 जो हाथ न आया हाथ मेरे , बस उसके लिए तड़पना था. 6 47
04 Feb 2010 कहीं भी जाएँ तुम्हारी गली में फिरते हैं.!२! 8 54
04 Feb 2010 जो बख्शता है तो दुनिया हमें खराब न दे ! 5 46
03 Feb 2010 हुए लफ्ज़ लफ्ज़ हैं आईने मेरे सब सुखन हैं संवर गए ! 10 46
03 Feb 2010 धर्म ध्वंस के अब पर्याय,ईश्वर अल्ला सब निरुपाय 13 59
02 Feb 2010 अभी न इतनी ज़ल्दी हार , चादर भर तो पांव पसार ! 8 47
02 Feb 2010 ऐ काश तू ही मिले हासिल सफ़र जानां ! 5 50
02 Feb 2010 रात भर देखने की हसरत की ! 12 54
01 Feb 2010 ये और बात है अहसान सब भुलाते हैं ! 8 56
01 Feb 2010 हम क्या हैं पूछा सबने, कीमत पर पहचानी कम ! 8 52
31 Jan 2010 तुम्हारी लम्हा ब लम्हा बस आरज़ू की है ! 4 47
30 Jan 2010 चंद लाइनें बस कहनी थीं, 4 56
30 Jan 2010 खेत बने कालोनियां सूखे सारे ताल ! 7 98
29 Jan 2010 हाले दिल जानता है सब साक़ी ! 4 43
29 Jan 2010 इल्तिजा का जवाब मांगें वो और निगाहों से लाजवाब करें ! 6 44
29 Jan 2010 हमें भी प्यार से देखा तो था कभी जानां 4 49
28 Jan 2010 मुझे खुशबुओं से नवाज़ दे 6 43
28 Jan 2010 शिद्दते दर्द कभी कम न हुई 8 54
28 Jan 2010 शीरीं लब मीठी बातों में तल्ख़ कहानी भूल गए हैं ! 4 40
27 Jan 2010 बातें तो बेकार की बावन हाथ जुबान 8 47
27 Jan 2010 माँ के पैरों में जो जन्नत देखी ! 6 49
27 Jan 2010 दोऊ हाथ बटोरिये जितना सकें बटोर ! 6 41
26 Jan 2010 तुम्हे पात पीले पसंद आ रहे हैं ! 4 39
26 Jan 2010 सुना है वो जालिम संवरने लगा है ! 8 49
25 Jan 2010 ज़ुल्फ़ बिखराए रुख पे आये वो 4 45
25 Jan 2010 सेवा का व्रत ले किया मेवे का व्यापार 6 40
25 Jan 2010 तुम्हे ही उज्र रहा साथ साथ चलने में ! 6 41
15 Jan 2010 गम से देनी निजात थी सबको 7 55
15 Jan 2010 वर्ना तो ये हमदर्दी बस एक नुमाईश है ! 2 37
15 Jan 2010 इस गुल में भी है खुशबू,सीने पे सजाओ भी ! 6 37
14 Jan 2010 ये उसकी नज़र, उसकी नज़र, उसकी नज़र है ! 8 71
13 Jan 2010 तुमसे तो निभ चुकी कि तुम्हे वक़्त ही नहीं 6 69
13 Jan 2010 ऐसा नशा न आया कभी पहले साक़िया 9 70
12 Jan 2010 उनको जब से संवरते देखा है ! 8 63
11 Jan 2010 डायनासोर बिला गए बचे फ़क़त काक्रोच ! 5 74
08 Jan 2010 फूल खिले गुलदान में सूनी वन में शाख! 4 59
07 Jan 2010 लडूं मैं जग से कभी कर सका न साहस मैं ! 4 71
07 Jan 2010 नींद अगर पहले खुल जाती ,क्यों सपने साकार न होते ! 6 66
06 Jan 2010 नादिम हुए हैं तुझको सुना कर के हाले दिल ! 4 65
04 Jan 2010 जो हमारा नहीं हो सका ,बस उसे याद करते रहे ! 6 89
04 Jan 2010 रिफाक़त की ये कीमत मांगते हैं 2 66
03 Jan 2010 रौशनी की तो वैसे लकीरें हुईं 0 50
03 Jan 2010 मुझे ही लोग दीवाना कहेंगे ! 2 60
02 Jan 2010 तुम्हारी याद, हरसिंगार जैसे 0 53
02 Jan 2010 हर कोयला सुनहरा है ! 0 54
01 Jan 2010 हमसफर तो थे, हम ख्याल न थे 2 84
01 Jan 2010 खुद से छिपना मगर असंभव है ! 2 67
31 Dec 2009 शीरीं ने भी बदल है लिया नुक्ता -ए -नज़र 2 70
31 Dec 2009 ये शहर है हसीन ख्वाबों का 2 69
30 Dec 2009 दिल को दिल से मिलेगी राह ज़रूर 2 68
30 Dec 2009 वो तो चेहरा तलक भी भूल गया ! 2 60
29 Dec 2009 उसको देखे तो एक उमर गुजरी 2 93
29 Dec 2009 सबकी नज़रों में मत उतर इतना ! 3 73
29 Dec 2009 अपनी नज़रों में कहाँ तक गिरते ! 2 53
25 Dec 2009 उसकी नज़रों ने है बख्शा किसको 12 112
24 Dec 2009 ये अजगर आदमी निगले हुए हैं !! 8 90
24 Dec 2009 ज़िन्दगी यूँ न हार सहरा में ! 6 89
24 Dec 2009 उसके रुखसार की घुली रंगत मेरी गुलनार हो गयीं शामें ! 4 82
23 Dec 2009 जब से उनकी नज़र छू गयी ज़िन्दगी मदमयी हो गयी ! 8 89
23 Dec 2009 दाम अगर देने का दम हो, हिलता है अब हर ध्रुव तारा ! 14 77
22 Dec 2009 आखिर वो शोख दिल का ही मेहमान हो गया ! 4 68
22 Dec 2009 उसके हँसते ही सारा चमन खिल उठा 3 69
21 Dec 2009 हो मुबारक हो मुबारक ये नया साल तुम्हें !! 6 237
21 Dec 2009 मेरी आँखों में मगर ख्वाब तेरे पलते हैं ! 4 83
20 Dec 2009 जिसे वफ़ा का मुजस्सिम बदल समझता था 0 66
20 Dec 2009 तेरे प्यार के ये निशान थे जो छुए गए तो चमक गए 6 78
19 Dec 2009 बेहुनर आज मकबूल हैं 2 75
19 Dec 2009 सारे खूबरू शौहर रहे उनके ! 0 60
19 Dec 2009 फिर भी बैठे हुए हैं दिल थामे 0 71
18 Dec 2009 ये नमी काट डालेगी दिल 2 76
18 Dec 2009 पास रख कर तेरे प्यार का उम्र भर हम सुलगते रहे 4 86
17 Dec 2009 गारंटी 10 83
17 Dec 2009 “चोरी का कुत्ता न घर का न घाट का’” 7 86
16 Dec 2009 उसका दामन ढलकने लगा 4 87
16 Dec 2009 तुम्हीं से प्यार होना लाजमी था? 6 88
15 Dec 2009 रौशनी थी पराये घर की वो 2 80
15 Dec 2009 ज़मीर बेच रहे थे सभी मैं लौट आया 5 90
14 Dec 2009 आशना इस तरह मिला कोई 8 110
30 Nov 2009 मुद्रा की आकर्षक मुद्रा पर महफ़िल बेहोश 4 104
30 Nov 2009 दफ्तर विचित्र देश है दफ्तर विचित्र व्यापार है. 2 103
28 Nov 2009 उसकी आँखों को ही चल राह का तारा कर लें 2 97
27 Nov 2009 है आंसुओं में गूँधी अहसास की ये मिटटी 2 99
26 Nov 2009 तू है ज़मीन तेरी हदें हैं बंधीं हुईं 2 121
26 Nov 2009 भर न मुट्ठी में जान कर जुगनू 2 116
25 Nov 2009 फलक के सितारों से बहलें भी कब तक 4 87
25 Nov 2009 सखि री साँझ बहुत मन साले 6 116
24 Nov 2009 मुखबिरी अश्कों ने दर्दे दिल की की 4 131
24 Nov 2009 श्री कृष्ण वंदना 3 125
24 Nov 2009 उदास यादों के झुरमुटों में वो झिलमिलाती शमा सा चेहरा 2 88
23 Nov 2009 मेहमान थे जो दिल के, सभी घर बदल गए 6 109
23 Nov 2009 सखि पोंछ नयन वे आते हैं 4 93
22 Nov 2009 उजड़ गए नींदों के मधुबन मुरझाये ख्वाबों के फूल 10 118
14 Nov 2009 खुशबुएँ छोड़ आयी कहाँ दोस्तों 0 105
14 Nov 2009 mchhali ko aaj fir badi machhali nigal gayee/मछली को आज फिर बड़ी मछली निगल गयी 4 113
14 Nov 2009 Raat bhar meghna madhu chhalakti rahi/ रात भर मेघना मधु छलकती रही 2 109
14 Nov 2009 aap chup ho gaye bolte bolte/ आप चुप हो गए बोलते बोलते . 0 87
14 Nov 2009 धुआं तमाम , रौशनी है कम 0 100
14 Nov 2009 पंछी में अभी कुव्वते परवाज है बहुत 0 76
14 Nov 2009 वो लौट के न आएगा अब रास्ता न देख 4 117
13 Nov 2009 बर्बरीक हतबुद्धि श्रृंग से हर अवलोके धर्म क्षेत्र के धर्म युद्ध के धंधे धोखे 0 87
13 Nov 2009 उसकी आँखों ने कुछ कहा तो है 2 99
13 Nov 2009 फ़रिश्ता आएगा कोई न आसमानों से 2 77
13 Nov 2009 इधर भी तिश्ना लबों का हुजूम बेकल है 0 72
12 Nov 2009 mat chheeno mujhse mere swar/मत छीनो मुझसे मेरे स्वर 0 93
10 Nov 2009 निकल तो जाऊँ ज़रा जात के हिसारों से 3 119
10 Nov 2009 झर पड़ेंगे अंधे जुगनू लाख दामन में अभी 2 102
08 Nov 2009 puja krenege aap ko patthar bana ke log 2 118
08 Nov 2009 ana ko itni bulundi pe le gaye saare 0 118
08 Nov 2009 rahin suraten to nazar me bahut 5 123
06 Nov 2009 shiv rupi yeh ped kahava 6 119
06 Nov 2009 dhai aakhar nahin padh saka 3 112
06 Nov 2009 गिरी पंखुडी जो किताब से तेरी याद फिर से जगा गयी 2 97
05 Nov 2009 अभिमन्युओं के खून से सब हाथ सन गए 2 111
05 Nov 2009 चंद लम्हात में हो जायेगी रुदाद तमाम 4 96
04 Nov 2009 unhin ka daamne shaffaq daag daag mila 0 77
03 Nov 2009 मैं भी शायद संवर गया होता 0 47
02 Nov 2009 मैं हूँ मुन्तजिर तेरे लम्स का कभी प्यार से तो पुकार ले 4 118
31 Oct 2009 sabke seene hi bane sar dekhe 1 94
30 Oct 2009 junoon samajh ke jise 6 115
29 Oct 2009 aap jayen na dil tod kar 0 89
29 Oct 2009 ye bisaat hai bade khel ki 2 102
27 Oct 2009 chidian kahan rahen ab jaake 0 80
26 Oct 2009 ajnabiyat hui tarze-nau 0 105
24 Oct 2009 धुंध छाई है तेरी यादों की कुछ भी दिखता नहीं सिवा तेरे 4 148
24 Oct 2009 gair ke ashq se num na hon jiski aankhe vo insaan kya 2 116
23 Oct 2009 कहाँ खो गए काफिले रौशनी के 3 140
21 Oct 2009 सवारूँ किस तरह दुनिया , जिधर देखो कमी निकले 0 72
21 Oct 2009 इनसे रौनक बहारों की है वरना फूलों की मुस्कान क्या 3 166
20 Oct 2009 उसने देखा नज़र भर मुझे 5 139
14 Oct 2009 dhar talwar ki parakhne me ja b ja dekh kitne sar bikhare 0 108
14 Oct 2009 यूँ परिंदों के सारे घर बिखरे 4 163
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