I am an engineer by training and sahitya premi by nature. I started writing when 16 years of age and have reached to the present level of proficiency till now. It is for the "kavya rasiks" to judge how far i have reached. "benoor nargis chaman mein deedavar ki talash mein hun-s.n.singh
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| 13 Mar 2010 |
चलो कहीं दिल और लगाओ,उनको कब फुर्सत मिलती है !
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| 13 Mar 2010 |
चमन में आके तुम्हारी मिसाल देते हैं !
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| 12 Mar 2010 |
जब निकले वो शहर सजाने !
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| 12 Mar 2010 |
बादलों में ढंकी चांदनी !
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| 12 Mar 2010 |
हैं बहिरंतर क्षत विक्षत हम !
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| 12 Mar 2010 |
अंगरागों से चेहरे मले जा रहे !
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| 11 Mar 2010 |
अर्थ के अनर्थ देखिये !
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| 11 Mar 2010 |
नक्श नज़र आते जब तेरे चंदा की रानाई में !
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| 10 Mar 2010 |
यहाँ इंसान कठपुतली बने हैं !
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| 10 Mar 2010 |
गैर को प्यार कहाँ करते हैं !
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| 10 Mar 2010 |
मुल्क को चद्दर बना बैठे हैं लोग.
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| 09 Mar 2010 |
खेल जीत का आगे ही है, जंग अभी है ज़ारी जी.
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| 09 Mar 2010 |
न चाहत में देखी ख़ुशी आप ने
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| 09 Mar 2010 |
अच्छी मजलिस में आये हम,स्वर गूंगे, श्रोता बहरे हैं.
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| 08 Mar 2010 |
झुकता है आकाश, बढ़ा कर हाथ रौशनी बीनेंगे.!
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| 08 Mar 2010 |
हालाते मुल्क पर ये भला तब्सिरा रहा !
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| 08 Mar 2010 |
कुछ दिल गुजिश्त अपनी बतानी शुरू करें !
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| 08 Mar 2010 |
मगर हम जुर्म की औरों पे तोहमत मढ़ नहीं पाए.
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| 07 Mar 2010 |
गुलशन गुलशन घूम रहे जो सब तेरे दीवाने हैं.
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| 07 Mar 2010 |
फ़क़त उम्र भर पापड बेले.!
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| 07 Mar 2010 |
यूँ न चुटकी में कोई फ़न आये.!
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| 06 Mar 2010 |
इंगितों से लरजायीं डोरियाँ किसी ने !
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| 06 Mar 2010 |
बजेंगे घने खूब थोथे चने !
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| 05 Mar 2010 |
सखी कैसा सिसकता है बरसती सांझ का पानी. !
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| 04 Mar 2010 |
आये ना घनश्याम सखी री !
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| 04 Mar 2010 |
सीता न सिर्फ सोन हिरन से छली गयी !
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| 04 Mar 2010 |
कुछ तो कीजे कि ये मौसम बदले.!
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| 03 Mar 2010 |
आईना ले के हम सोचते रह गए.!
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| 03 Mar 2010 |
हम न यूँ ही फ़क़त बदगुमां हो गए !
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| 03 Mar 2010 |
पर मिले सबसे टूट कर हम भी !
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| 02 Mar 2010 |
जोगीड़ा सारा रा रा !
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| 02 Mar 2010 |
होलियों में याद आते हैं, भौजियों को हाथ बबुआ के !
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| 01 Mar 2010 |
बता देंगे बातें चलो नैन कारे !
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| 28 Feb 2010 |
धर्मराज हैं द्यूतरत , रहे शकुनि सब जीत !
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| 27 Feb 2010 |
चला सजनी मूंदा अंखिया पिया अब न अइहें !
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| 27 Feb 2010 |
दर्पण अन्धराया एक रहा,वो भी गुगली से चार प्रभो.
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| 27 Feb 2010 |
खुद से भी रहने लगे नाराज़ हम !
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| 27 Feb 2010 |
आईना देखते ही गए हम जो डर !
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| 26 Feb 2010 |
ज़ज्बातों के पौधे कोमल, मन की मिटटी को नम रखिये.
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| 25 Feb 2010 |
झील में देखता आईना रात भर !
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| 25 Feb 2010 |
हक़ से लेकिन कोई गाफिल ना रहा !
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| 25 Feb 2010 |
क्या करेंगे तेरे प्यार की वो कदर !
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| 24 Feb 2010 |
दिल रख दिया क़दमों में ज़रो-माल न देखे !
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| 24 Feb 2010 |
कर रहे हैं बात सब तलवार से !
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| 24 Feb 2010 |
हम हुए भी तो क्यों फ़िज़ूल अलग !
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| 23 Feb 2010 |
गीत रचे उस गीतकार ने मैं गुनगुना रहा हूँ !
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| 23 Feb 2010 |
रुख्सारे गुल पे लाजिम है ताज़गी का आलम
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| 22 Feb 2010 |
छल गए बहुरूपिये से क्षण.!
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| 22 Feb 2010 |
उसके हाथों में हैं डोरियाँ,पुतलियाँ मग्न हैं नाच में !
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| 22 Feb 2010 |
हम थे चाहत के मुजरिम मगर,जुर्म ये भी न आया हमें !
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| 21 Feb 2010 |
छाया के गीत बहुत दीर्घ हुए जाते है
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| 21 Feb 2010 |
भुज मृणालों में तुम्हारी बद्ध मैं खोया हुआ सा.
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| 21 Feb 2010 |
जितने गुल खिलने थे अब तक, खिल लिए !
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| 20 Feb 2010 |
यहाँ तो फूल सब कुम्हला चुके हैं !
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| 19 Feb 2010 |
मिट्टी सबकी एक है सूरत भले अनेक.
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| 19 Feb 2010 |
गुरुरे हुस्न तो कब कम हुआ है !
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| 19 Feb 2010 |
स्वर तुम्हारे नहीं पा सकी,गीतिका रह गयी मौन ही !
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| 18 Feb 2010 |
फिर भी क्यों हम पर नज़र होती नहीं!
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| 18 Feb 2010 |
तुझको ऐ दिल अभी संभलना था !
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| 18 Feb 2010 |
रच दो जादू अँगुलियों से तन मेरा चन्दन हो जाए !
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| 17 Feb 2010 |
छोड़ कर इश्क का चलन प्यारे
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| 17 Feb 2010 |
देख कर जेन नेक्स्ट को ऐसे रिदम की ताल में
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| 16 Feb 2010 |
आप थे इस क़दर खूबसूरत कहाँ !
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| 16 Feb 2010 |
पिलाने का अजब ही ढब रखा है !
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| 15 Feb 2010 |
सतरें पड़ीं है फूल पे खुशबू के पांव से
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| 15 Feb 2010 |
यही तो हासिल है ज़िन्दगी का लगा रहेगा ये जीना मरना !
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| 14 Feb 2010 |
रुदादे इश्क छोड़ कोई और बात कर !
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| 14 Feb 2010 |
सारे फ़िदा ए यार तो दुनिया में खो गए !
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| 13 Feb 2010 |
दुआ ये करो सब्र दिल को मिले,दिया रब ने यूँ भी मियां है बहुत
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| 13 Feb 2010 |
डार्लिंग डार्लिंग रट रहे गलती मगर न दाल
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| 13 Feb 2010 |
हमारे पांव थे शबनम के फूल फूल चले
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| 12 Feb 2010 |
कहीं रहोगे मेरे दिल की जान लोगे तुम
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| 12 Feb 2010 |
रस्मे उल्फत निभाई यूँ मैनें , चुप थे,क्या उसको बेवफा कहते !
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| 12 Feb 2010 |
हुस्न का है तेरे जवाब कहाँ !
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| 10 Feb 2010 |
कल पर रख दो सब मनुहारें,आज मेरा मन ठीक नहीं है !
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| 10 Feb 2010 |
रात के हामी हजारों हो गए,क्या करे सूरज बिचारा देखना !
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| 09 Feb 2010 |
अजब दोस्त एक आज हमको मिला है
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| 09 Feb 2010 |
जो कि पुराने ज़ख्म कुरेदें,वो अफ़साने क्यों पढ़ते हो !
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| 08 Feb 2010 |
बदन के पोर अब भी रात भर अपने दहकते हैं !
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| 08 Feb 2010 |
बता तू ही अब इस पर किस तरह लिक्खूं ग़ज़ल प्यारे !
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| 07 Feb 2010 |
आस्तीनों में छुरी रख मुंह में रखना राम राम
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| 06 Feb 2010 |
खिल उठीं आँखें तुम्हारी हैं कमल सी !
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| 06 Feb 2010 |
मेरी आँखों में विम्ब निहार,स्वयं पर सम्मोहित सी तुम !
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| 05 Feb 2010 |
गीत गुमनाम हैं गालियाँ पोपुलर,क्या कहें दोस्तों वक़्त के फेर हैं !
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| 05 Feb 2010 |
ग़म की शाम अँधेरी आई, यादों के जुगनू आये !
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| 05 Feb 2010 |
देह का दोहा हुआ संपूर्ण है, साँस करती साँस से संवाद है !
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| 04 Feb 2010 |
जो हाथ न आया हाथ मेरे , बस उसके लिए तड़पना था.
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| 04 Feb 2010 |
कहीं भी जाएँ तुम्हारी गली में फिरते हैं.!२!
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| 04 Feb 2010 |
जो बख्शता है तो दुनिया हमें खराब न दे !
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| 03 Feb 2010 |
हुए लफ्ज़ लफ्ज़ हैं आईने मेरे सब सुखन हैं संवर गए !
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| 03 Feb 2010 |
धर्म ध्वंस के अब पर्याय,ईश्वर अल्ला सब निरुपाय
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| 02 Feb 2010 |
अभी न इतनी ज़ल्दी हार , चादर भर तो पांव पसार !
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| 02 Feb 2010 |
ऐ काश तू ही मिले हासिल सफ़र जानां !
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| 02 Feb 2010 |
रात भर देखने की हसरत की !
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| 01 Feb 2010 |
ये और बात है अहसान सब भुलाते हैं !
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| 01 Feb 2010 |
हम क्या हैं पूछा सबने, कीमत पर पहचानी कम !
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| 31 Jan 2010 |
तुम्हारी लम्हा ब लम्हा बस आरज़ू की है !
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| 30 Jan 2010 |
चंद लाइनें बस कहनी थीं,
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| 30 Jan 2010 |
खेत बने कालोनियां सूखे सारे ताल !
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| 29 Jan 2010 |
हाले दिल जानता है सब साक़ी !
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| 29 Jan 2010 |
इल्तिजा का जवाब मांगें वो और निगाहों से लाजवाब करें !
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| 29 Jan 2010 |
हमें भी प्यार से देखा तो था कभी जानां
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| 28 Jan 2010 |
मुझे खुशबुओं से नवाज़ दे
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| 28 Jan 2010 |
शिद्दते दर्द कभी कम न हुई
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| 28 Jan 2010 |
शीरीं लब मीठी बातों में तल्ख़ कहानी भूल गए हैं !
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| 27 Jan 2010 |
बातें तो बेकार की बावन हाथ जुबान
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| 27 Jan 2010 |
माँ के पैरों में जो जन्नत देखी !
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| 27 Jan 2010 |
दोऊ हाथ बटोरिये जितना सकें बटोर !
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| 26 Jan 2010 |
तुम्हे पात पीले पसंद आ रहे हैं !
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| 26 Jan 2010 |
सुना है वो जालिम संवरने लगा है !
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| 25 Jan 2010 |
ज़ुल्फ़ बिखराए रुख पे आये वो
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| 25 Jan 2010 |
सेवा का व्रत ले किया मेवे का व्यापार
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| 25 Jan 2010 |
तुम्हे ही उज्र रहा साथ साथ चलने में !
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| 15 Jan 2010 |
गम से देनी निजात थी सबको
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| 15 Jan 2010 |
वर्ना तो ये हमदर्दी बस एक नुमाईश है !
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| 15 Jan 2010 |
इस गुल में भी है खुशबू,सीने पे सजाओ भी !
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| 14 Jan 2010 |
ये उसकी नज़र, उसकी नज़र, उसकी नज़र है !
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| 13 Jan 2010 |
तुमसे तो निभ चुकी कि तुम्हे वक़्त ही नहीं
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| 13 Jan 2010 |
ऐसा नशा न आया कभी पहले साक़िया
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| 12 Jan 2010 |
उनको जब से संवरते देखा है !
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| 11 Jan 2010 |
डायनासोर बिला गए बचे फ़क़त काक्रोच !
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| 08 Jan 2010 |
फूल खिले गुलदान में सूनी वन में शाख!
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| 07 Jan 2010 |
लडूं मैं जग से कभी कर सका न साहस मैं !
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| 07 Jan 2010 |
नींद अगर पहले खुल जाती ,क्यों सपने साकार न होते !
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| 06 Jan 2010 |
नादिम हुए हैं तुझको सुना कर के हाले दिल !
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| 04 Jan 2010 |
जो हमारा नहीं हो सका ,बस उसे याद करते रहे !
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| 04 Jan 2010 |
रिफाक़त की ये कीमत मांगते हैं
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| 03 Jan 2010 |
रौशनी की तो वैसे लकीरें हुईं
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| 03 Jan 2010 |
मुझे ही लोग दीवाना कहेंगे !
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| 02 Jan 2010 |
तुम्हारी याद, हरसिंगार जैसे
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| 02 Jan 2010 |
हर कोयला सुनहरा है !
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| 01 Jan 2010 |
हमसफर तो थे, हम ख्याल न थे
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| 01 Jan 2010 |
खुद से छिपना मगर असंभव है !
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| 31 Dec 2009 |
शीरीं ने भी बदल है लिया नुक्ता -ए -नज़र
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| 31 Dec 2009 |
ये शहर है हसीन ख्वाबों का
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| 30 Dec 2009 |
दिल को दिल से मिलेगी राह ज़रूर
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| 30 Dec 2009 |
वो तो चेहरा तलक भी भूल गया !
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| 29 Dec 2009 |
उसको देखे तो एक उमर गुजरी
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| 29 Dec 2009 |
सबकी नज़रों में मत उतर इतना !
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| 29 Dec 2009 |
अपनी नज़रों में कहाँ तक गिरते !
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| 25 Dec 2009 |
उसकी नज़रों ने है बख्शा किसको
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| 24 Dec 2009 |
ये अजगर आदमी निगले हुए हैं !!
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| 24 Dec 2009 |
ज़िन्दगी यूँ न हार सहरा में !
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| 24 Dec 2009 |
उसके रुखसार की घुली रंगत मेरी गुलनार हो गयीं शामें !
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| 23 Dec 2009 |
जब से उनकी नज़र छू गयी ज़िन्दगी मदमयी हो गयी !
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| 23 Dec 2009 |
दाम अगर देने का दम हो, हिलता है अब हर ध्रुव तारा !
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| 22 Dec 2009 |
आखिर वो शोख दिल का ही मेहमान हो गया !
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| 22 Dec 2009 |
उसके हँसते ही सारा चमन खिल उठा
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| 69 |
| 21 Dec 2009 |
हो मुबारक हो मुबारक ये नया साल तुम्हें !!
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| 21 Dec 2009 |
मेरी आँखों में मगर ख्वाब तेरे पलते हैं !
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| 20 Dec 2009 |
जिसे वफ़ा का मुजस्सिम बदल समझता था
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| 20 Dec 2009 |
तेरे प्यार के ये निशान थे जो छुए गए तो चमक गए
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| 19 Dec 2009 |
बेहुनर आज मकबूल हैं
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| 19 Dec 2009 |
सारे खूबरू शौहर रहे उनके !
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| 19 Dec 2009 |
फिर भी बैठे हुए हैं दिल थामे
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| 18 Dec 2009 |
ये नमी काट डालेगी दिल
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| 18 Dec 2009 |
पास रख कर तेरे प्यार का उम्र भर हम सुलगते रहे
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| 17 Dec 2009 |
गारंटी
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| 17 Dec 2009 |
“चोरी का कुत्ता न घर का न घाट का’”
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| 86 |
| 16 Dec 2009 |
उसका दामन ढलकने लगा
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| 16 Dec 2009 |
तुम्हीं से प्यार होना लाजमी था?
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| 88 |
| 15 Dec 2009 |
रौशनी थी पराये घर की वो
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| 80 |
| 15 Dec 2009 |
ज़मीर बेच रहे थे सभी मैं लौट आया
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| 90 |
| 14 Dec 2009 |
आशना इस तरह मिला कोई
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| 30 Nov 2009 |
मुद्रा की आकर्षक मुद्रा पर महफ़िल बेहोश
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| 30 Nov 2009 |
दफ्तर विचित्र देश है दफ्तर विचित्र व्यापार है.
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| 103 |
| 28 Nov 2009 |
उसकी आँखों को ही चल राह का तारा कर लें
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| 27 Nov 2009 |
है आंसुओं में गूँधी अहसास की ये मिटटी
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| 26 Nov 2009 |
तू है ज़मीन तेरी हदें हैं बंधीं हुईं
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| 26 Nov 2009 |
भर न मुट्ठी में जान कर जुगनू
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| 116 |
| 25 Nov 2009 |
फलक के सितारों से बहलें भी कब तक
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| 87 |
| 25 Nov 2009 |
सखि री साँझ बहुत मन साले
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| 116 |
| 24 Nov 2009 |
मुखबिरी अश्कों ने दर्दे दिल की की
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| 131 |
| 24 Nov 2009 |
श्री कृष्ण वंदना
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| 24 Nov 2009 |
उदास यादों के झुरमुटों में वो झिलमिलाती शमा सा चेहरा
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| 23 Nov 2009 |
मेहमान थे जो दिल के, सभी घर बदल गए
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| 23 Nov 2009 |
सखि पोंछ नयन वे आते हैं
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| 22 Nov 2009 |
उजड़ गए नींदों के मधुबन मुरझाये ख्वाबों के फूल
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| 14 Nov 2009 |
खुशबुएँ छोड़ आयी कहाँ दोस्तों
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| 14 Nov 2009 |
mchhali ko aaj fir badi machhali nigal gayee/मछली को आज फिर बड़ी मछली निगल गयी
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| 14 Nov 2009 |
Raat bhar meghna madhu chhalakti rahi/ रात भर मेघना मधु छलकती रही
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| 14 Nov 2009 |
aap chup ho gaye bolte bolte/ आप चुप हो गए बोलते बोलते .
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| 14 Nov 2009 |
धुआं तमाम , रौशनी है कम
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| 14 Nov 2009 |
पंछी में अभी कुव्वते परवाज है बहुत
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| 14 Nov 2009 |
वो लौट के न आएगा अब रास्ता न देख
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| 13 Nov 2009 |
बर्बरीक हतबुद्धि श्रृंग से हर अवलोके धर्म क्षेत्र के धर्म युद्ध के धंधे धोखे
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| 13 Nov 2009 |
उसकी आँखों ने कुछ कहा तो है
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| 13 Nov 2009 |
फ़रिश्ता आएगा कोई न आसमानों से
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| 13 Nov 2009 |
इधर भी तिश्ना लबों का हुजूम बेकल है
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| 12 Nov 2009 |
mat chheeno mujhse mere swar/मत छीनो मुझसे मेरे स्वर
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| 10 Nov 2009 |
निकल तो जाऊँ ज़रा जात के हिसारों से
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| 10 Nov 2009 |
झर पड़ेंगे अंधे जुगनू लाख दामन में अभी
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| 08 Nov 2009 |
puja krenege aap ko patthar bana ke log
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| 08 Nov 2009 |
ana ko itni bulundi pe le gaye saare
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| 08 Nov 2009 |
rahin suraten to nazar me bahut
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| 06 Nov 2009 |
shiv rupi yeh ped kahava
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| 06 Nov 2009 |
dhai aakhar nahin padh saka
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| 06 Nov 2009 |
गिरी पंखुडी जो किताब से तेरी याद फिर से जगा गयी
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| 05 Nov 2009 |
अभिमन्युओं के खून से सब हाथ सन गए
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| 05 Nov 2009 |
चंद लम्हात में हो जायेगी रुदाद तमाम
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| 04 Nov 2009 |
unhin ka daamne shaffaq daag daag mila
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| 03 Nov 2009 |
मैं भी शायद संवर गया होता
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| 02 Nov 2009 |
मैं हूँ मुन्तजिर तेरे लम्स का कभी प्यार से तो पुकार ले
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| 31 Oct 2009 |
sabke seene hi bane sar dekhe
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| 30 Oct 2009 |
junoon samajh ke jise
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| 29 Oct 2009 |
aap jayen na dil tod kar
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| 29 Oct 2009 |
ye bisaat hai bade khel ki
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| 27 Oct 2009 |
chidian kahan rahen ab jaake
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| 26 Oct 2009 |
ajnabiyat hui tarze-nau
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| 24 Oct 2009 |
धुंध छाई है तेरी यादों की कुछ भी दिखता नहीं सिवा तेरे
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| 24 Oct 2009 |
gair ke ashq se num na hon jiski aankhe vo insaan kya
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| 23 Oct 2009 |
कहाँ खो गए काफिले रौशनी के
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| 21 Oct 2009 |
सवारूँ किस तरह दुनिया , जिधर देखो कमी निकले
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| 21 Oct 2009 |
इनसे रौनक बहारों की है वरना फूलों की मुस्कान क्या
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| 20 Oct 2009 |
उसने देखा नज़र भर मुझे
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| 14 Oct 2009 |
dhar talwar ki parakhne me ja b ja dekh kitne sar bikhare
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| 14 Oct 2009 |
यूँ परिंदों के सारे घर बिखरे
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