I am an engineer by training and sahitya premi by nature. I started writing when 16 years of age and have reached to the present level of proficiency till now. It is for the "kavya rasiks" to judge how far i have reached. "benoor nargis chaman mein deedavar ki talash mein hun, I am also available at my blog site -siddhanathsingh.blogspot.com- s.n.singh
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| 03 Sep 2010 |
पुरबा बहेले सिवनवां
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| 03 Sep 2010 |
कहते कहते कहानी न जाये बदल.
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| 02 Sep 2010 |
अब छोडिये वफ़ा का तमाशा न कीजिये
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| 02 Sep 2010 |
वो खामोश है पर बड़ा पुर तरन्नुम
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| 01 Sep 2010 |
कहीं दुनिया तुम्हारी है, कहीं दुनिया हमारी है
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| 30 Aug 2010 |
तुम्हारे साथ चलना था तुम्हारे साथ चलते हैं.
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| 23 |
| 29 Aug 2010 |
तुम ही कहो कि उससे कोई जा के क्या मिले
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| 29 Aug 2010 |
उदास यादों के झुरमुटों में वो झिलमिलाता शमा सा चेहरा .
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| 29 Aug 2010 |
सुन लीं बात हमार बलमवां
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| 28 Aug 2010 |
देश द्वेष का हो रहा नित्य प्राय पर्याय,
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| 28 Aug 2010 |
यादों में वो ज़रूर सुब्हो शाम आएगा
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| 28 Aug 2010 |
अच्छा सफ़र था, पीर मिले ,देवता मिले
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| 26 Aug 2010 |
यूँ न बर्बाद हम रहे होते
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| 26 Aug 2010 |
जी तो हैं हम रहे ज़िन्दगी है कहाँ
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| 26 Aug 2010 |
प्यार करके भुला नहीं देते
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| 25 Aug 2010 |
यूँ छुप के तो बर्बाद मेरी ईद न करिए.
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| 25 Aug 2010 |
ज़िन्दगी ने सलीक़े सिखाये कई,
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| 24 Aug 2010 |
ज़िन्दगी की न जिद्दो जहद कम हुई.
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| 24 Aug 2010 |
जिधर है जोर हवाओं का, मुड़ रहा हूँ मैं.
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| 23 Aug 2010 |
भुलाने में तुझको ज़माने लगेंगे.
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| 22 Aug 2010 |
कौन अजब जादू है नैन में तुम्हारे
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| 22 Aug 2010 |
खो गए दम ब दम आदमी
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| 21 Aug 2010 |
जिस आदमी ने हमें आदमी बनाया था,
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| 21 Aug 2010 |
आदमी को न दे अहमियत आदमी.
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| 21 Aug 2010 |
मेहरबां आदमी मातहत आदमी
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| 18 Aug 2010 |
एक समंदर से गुज़रे मगर , उम्र भर लोग प्यासे रहे.
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| 17 Aug 2010 |
ख्वाबों की असलियत को परखते हुए जिए.
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| 16 Aug 2010 |
कुछ शख्स ज़िन्दगी में होते बहुत अहम हैं.
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| 16 Aug 2010 |
उससे बड़ा मदारी है कौन दूसरा ,वो
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| 15 Aug 2010 |
जो स्वतन्त्र देश को बनाने पर तुले हैं शव तंत्र ?
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| 15 Aug 2010 |
आये जो हो शहर में, खुद को बचा के रखना.
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| 14 Aug 2010 |
अब तो अपनी नज़र बस सितारों पे है.
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| 14 Aug 2010 |
प्यास दीदार की अनबुझी आज भी.
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| 14 Aug 2010 |
अब तो अपनी नज़र बस सितारों पे है.
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| 13 Aug 2010 |
आओ शजर ये सींचें सम्हालें बड़ा करें .
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| 11 Aug 2010 |
दस्तकें बेज़ुबां हो गयीं.
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| 10 Aug 2010 |
आसरा दे के अब मुकरते हैं
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| 10 Aug 2010 |
बैठे हैं बज़्म में सब चुप सी लगी हुई है.
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| 09 Aug 2010 |
सहलाती हैं पलकें मेरी ख्वाबों के परों को.
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| 09 Aug 2010 |
नाखुदाई के इम्तिहाँ ठहरे.
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| 08 Aug 2010 |
तेरे दर से जो लौट कर आये.
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| 08 Aug 2010 |
दो मुक्तक
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| 08 Aug 2010 |
जब से हैं हम किसी के हुए.
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| 07 Aug 2010 |
सबसे कहते भी हम तो क्या कहते
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| 07 Aug 2010 |
जब भी देखा नया नया सा लगा.
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| 06 Aug 2010 |
सपने तमाम टूटे नींदें तमाम खोयीं.
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| 06 Aug 2010 |
जिसे मंजरे आम पर कौंधना था,बनी बर्क जीनत वो जलसाघरों की.
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| 05 Aug 2010 |
गज़ब हाल देखे हैं दीदावरों के.
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| 05 Aug 2010 |
चार दिन चांदनी के रहे फिर अँधेरे यथावत हुए.
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| 04 Aug 2010 |
अब न साहिल न दरिया रहा
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| 04 Aug 2010 |
ये सोचते हैं अकेले कहाँ गुज़र होगी.
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| 03 Aug 2010 |
बिछुड़ गए तो तुझे फिर न देख पाए हम.
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| 03 Aug 2010 |
हैं कहती साँसें सफ़र यहीं तक.
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| 02 Aug 2010 |
गड्ढे बड़े बड़े हैं
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| 02 Aug 2010 |
जब से बीवी मियाँ हो गए
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| 01 Aug 2010 |
देश अपना है, घर अपना है सभी हैं अपने,
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| 01 Aug 2010 |
अभी से हार जाना क्या जंचेगा
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| 01 Aug 2010 |
वो अपने आप में सिमटा दिखाई देता है.
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| 31 Jul 2010 |
पग तरक्की के बढ़ने लगे,
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| 31 Jul 2010 |
हर बार शुरू होता वैसे ही फ़साना है,
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| 31 Jul 2010 |
छेड़े हैं दिल के तार तुम्हारी निगाह ने.
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| 30 Jul 2010 |
अहसासों पर बर्फ पड़ी है
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| 30 Jul 2010 |
क़दम गए थक तो हम भी लाचार हुए
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| 29 Jul 2010 |
ख्वाब जैसी गुज़रती रही ज़िन्दगी
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| 29 Jul 2010 |
आस्तीनें कुछ और कहती हैं,और दावा है बेगुनाही का.
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| 29 Jul 2010 |
दोपहरी में जीवन की क्यों काले बादल छाये हैं,
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| 27 Jul 2010 |
किससे मिलिए किसे मना कीजे
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| 27 Jul 2010 |
भोर सुहानी आँखें मलती अलसाई अलसाई सी
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| 25 Jul 2010 |
शहर में घर घर दग़े बहुत हैं
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| 24 Jul 2010 |
दर्द इतने दिए आप ने अब सुकूं भी अता कीजिये.
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| 24 Jul 2010 |
कुछ न हमको भी एतबार आया.
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| 23 Jul 2010 |
शहरे तमन्ना सूना सूना आँखें भी पथरायी सी.
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| 22 Jul 2010 |
सब इजहारे इश्क का ठहरा एक न एक बहाना बाबा.
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| 21 Jul 2010 |
फिर से आई लहर समुंदर से.
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| 20 Jul 2010 |
जिससे मिलना उसे मन से मिलना.
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| 20 Jul 2010 |
छोटी सी मायानगरी में क्या खोना क्या पाना बाबा.
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| 19 Jul 2010 |
शहर में तुम्हारे तो चरचे बहुत हैं.
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| 18 Jul 2010 |
किसके आगे दर्पण रक्खें सभी बेबसर बैठे हैं.
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| 17 Jul 2010 |
रात बिना दिन, दिन बिन रात नहीं होती
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| 17 Jul 2010 |
पूछ, हम आज मिले किनसे थे.
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| 17 Jul 2010 |
दिल ने मुश्किल से कहीं दफ़्न करे होते हैं.
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| 16 Jul 2010 |
जब हार ट्रालरों से सभी कश्तियाँ गयीं.
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| 16 Jul 2010 |
दिल में जज़्बात थे ऐसे कि बहुत रंज हुआ.
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| 15 Jul 2010 |
तुमसे बेकार है कहना सुनना
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| 14 Jul 2010 |
खोल के आखिर कौन अचानक यादों की अलमारी को.
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| 13 Jul 2010 |
कमाले कूजागरी यही है कि खाक से हो जमाल पैदा.
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| 13 Jul 2010 |
ज़िन्दगी को जब नए रस्ते पकड़ने आ गए
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| 13 Jul 2010 |
दायरा रौशनी का तंग रहा.
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| 13 Jul 2010 |
रात हो, नींद न हो, और अकेलापन हो.
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| 12 Jul 2010 |
अपने हुनर के कम ही ज़रा कद्रदां मिले.
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| 11 Jul 2010 |
खिजां के हाथ चमन कुछ न यूँही बरहम है.
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| 11 Jul 2010 |
बात गर उछली, सभी की शर्मसारी तय रही.
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| 10 Jul 2010 |
महफ़िल उठी जनाब, चलो अब तो घर चलें.
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| 10 Jul 2010 |
पहचान के निशान सभी वक़्त ले गया.
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| 09 Jul 2010 |
ये कहानी कभी फिर सही.
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| 08 Jul 2010 |
बेवफाई के शिकवे करेंगे सभी
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| 08 Jul 2010 |
वार पर वार पे हैं वार शहर में तेरे.
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| 07 Jul 2010 |
ये हवा-ए-गर्म थोड़ी देर चलने दीजिये.
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| 06 Jul 2010 |
अश्कों से दिल के दाग ज़रा पोंछने लगे.
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| 05 Jul 2010 |
आँखें पिघलीं मन भर आया.
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| 04 Jul 2010 |
मयकश के लिए अमृत है मय, जाहिद के लिए वो ज़हर सही.
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| 04 Jul 2010 |
सितम अपने जब तक सितमगर न छोड़ें.
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| 03 Jul 2010 |
मैं हूँ फूल जिसके कि रंगों बू का शहर को कोई पता नहीं.
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| 02 Jul 2010 |
कोई रौशनी की तलाश में, कोई रोशनी से परे गया.
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| 02 Jul 2010 |
फिर ये कैसा झोंका आया यादों के गलियारे में.
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| 02 Jul 2010 |
बादलों से आज निकला चाँद है.-2
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| 02 Jul 2010 |
फिर सफ़र आज उस मुक़ाम पे है.
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| 01 Jul 2010 |
अपने चहरे से नक़ाबों को हटाया न गया.
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| 01 Jul 2010 |
गम ये नहीं मुझे कि मेरा आशियाँ जला.
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| 01 Jul 2010 |
तुम कहीं भी रहो, रहो तो सही.
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| 01 Jul 2010 |
हाथ मेरे थे, न खंजर मेरे.
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| 30 Jun 2010 |
शायद फलक भी छू सकें,कोशिश तो कीजिये.
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| 30 Jun 2010 |
सबने अफसाने सुनाये हमने सच्चाई रखी.
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| 30 Jun 2010 |
भर्तृहरि के वैराग्य शतक के एक श्लोक से प्रेरित कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं-
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| 29 Jun 2010 |
चलते चलते कहाँ निकल आये.
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| 29 Jun 2010 |
हाथों में उनके दर्जनों नाम और पते रहे.
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| 29 Jun 2010 |
तुम्हारे साथ जो गुजरी सो ज़िन्दगी गुजरी.
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| 29 Jun 2010 |
कहाँ पे जाएँ कहाँ काली रात की जाये.
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| 18 Jun 2010 |
जाने तू क्यूँ खफा हुई हमसे.
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| 18 Jun 2010 |
तुम हो तनहा उधर इधर हम भी,
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| 18 Jun 2010 |
आ तेरा साथ भी ज़रूरी है.
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| 18 Jun 2010 |
ये तो एक दौलते परायी है.
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| 18 Jun 2010 |
तूने हंस कर जिसे बिखेरा है, मैं उसी चांदनी में डूबा हूँ.
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| 17 Jun 2010 |
फिर भींगा अन्दर तक अंतर.
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| 17 Jun 2010 |
TREES
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| 17 Jun 2010 |
दीदाए यार ने तराशा है,खूबरू कैसे हम नहीं होते.
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| 17 Jun 2010 |
पेड़ दस्ते दुआ ज़मीं के हैं.
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| 11 Jun 2010 |
ये उधेड़ बुन जो जिगर में है, तू मिले तो उसको सुकूं मिले.
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| 11 Jun 2010 |
मेरा कारवाने हयात तो था जहाँ,वहीँ पे ठहर गया
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| 11 Jun 2010 |
सारे शिकवे गिले रखो कल पर.
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| 05 Jun 2010 |
एक नयी सुबह जिसे बाम पे लाने के लिए.
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| 05 Jun 2010 |
दौड़ ये पर्यावरण की दौड़ने आये जिसे हम.
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| 04 Jun 2010 |
रोशन सड़क से आगे है तीरगी बला की.
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| 04 Jun 2010 |
कौन अजब जादू है नैन में तुम्हारे
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| 03 Jun 2010 |
महारथी हैं, वृहन्नला से नृत्य निरत समुदाय.
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| 03 Jun 2010 |
उसके शरमाते ही अम्बर में धनक सजते हैं.
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| 02 Jun 2010 |
हासिल सफ़र का क्या है पता ही नहीं मिला.
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| 02 Jun 2010 |
अपने अश्कों में ही जले देखो.
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| 01 Jun 2010 |
करें आचरण पाशविक कहलायें इंसान.
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| 31 May 2010 |
उसको चाहोगे तुम अगर दिल से.
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| 30 May 2010 |
हम जुस्तजू में चारसू ज़ेरे फलक गए.
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| 30 May 2010 |
सखि री सांझ बहुत मन साले.-2
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| 29 May 2010 |
नाचेंगे क्यों न मोर अगर यूँ नचाइये.
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| 29 May 2010 |
खामोशियों की उम्र न इतनी बढाइये.
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| 27 May 2010 |
भला कब तक तुम्हारी राह तकते.
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| 27 May 2010 |
संवारती मुझे है आप की सहज सराहना.
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| 26 May 2010 |
तेरी हर बात याद आने लगी है.
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| 26 May 2010 |
हरेक चेहरे पे तुम ही तो अयाँ थे.
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| 24 May 2010 |
तुम्हें भी चुप न रहना चाहिए था.
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| 24 May 2010 |
हरेक लब पे तुम्हारा ही तजकिरा आया.
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| 23 May 2010 |
पिता का दुःख दुल्हनिया जानती है.
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| 23 May 2010 |
दिए ज़ख्म दिल पर शबो रोज़ तुमने
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| 23 May 2010 |
इस कुएं से आ रही आवाज़ को सुनिए ज़रा.
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| 22 May 2010 |
ज़हन में जैसी है कागज़ पे भी उतर जानाँ.
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| 22 May 2010 |
बला ए जां हुनर अपना हुआ है.
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| 22 May 2010 |
उजाला बांटने आये थे क्या किया तुमने.
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| 21 May 2010 |
गम से मिलनी निजात मुश्किल है.
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| 21 May 2010 |
हुई कितनी सुहानी शाम यारों.
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| 21 May 2010 |
रक़ीब खुश तमाम हैं, फरेब उनके फल गए.
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| 20 May 2010 |
सोच की भागीरथी नीचे तो लाकर देखिये.
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| 20 May 2010 |
हम ही उल्फत के गुनहगार यहाँ.
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| 20 May 2010 |
समझिये आप ने खुदा पाया.
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| 19 May 2010 |
टोकरों के रंग से अब कितना धोखा खाइए. !
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| 19 May 2010 |
तुम्हे इसके सिवा आता है क्या.
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| 18 May 2010 |
यही अदम्य कामना क्षुधा न हो., तृषा न हो.-
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| 18 May 2010 |
वो लफ्ज़ लब पे ठिठक कर खड़े लरजते हैं.
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| 18 May 2010 |
है उनके कान में फाहा अतर का
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| 17 May 2010 |
यूँ न लीजे आप अब अंगड़ाइयाँ
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| 59 |
| 17 May 2010 |
गुनाहों में लज्ज़त हमेशा रही है.
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| 55 |
| 17 May 2010 |
उसे यूँ तो भुलाना चाहता हूँ.
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| 17 May 2010 |
तुम्हीं तमाम भीड़ में हो एक सिर्फ ढंग के.!
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| 56 |
| 16 May 2010 |
सभी चाहें दिखाना सबसे ऊंचा अपना क़द प्यारे !
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| 16 May 2010 |
तुझे दुनिया से लड़ने का सलीक़ा सीखना होगा !
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| 16 May 2010 |
वो क़हक़हा जो लबों पर ठिठक के रोया था !
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| 69 |
| 15 May 2010 |
वार तो होते रहेंगे, प्यार के अवसर निकालो.
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| 15 May 2010 |
धुंधली पड़ी तस्वीर है आँखें न मलो तुम.
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| 67 |
| 14 May 2010 |
खोया जो वजूद उसका निशां ढूंढ रहा है
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| 69 |
| 14 May 2010 |
जो कलई थी चढ़ी सब धुल चुकी है.
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| 71 |
| 14 May 2010 |
देखता भी रहे और आँख चुराता भी रहे.
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| 78 |
| 13 May 2010 |
सूरज को देखने की तुम्ही जिद पे थे अड़े !
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| 78 |
| 13 May 2010 |
मरीजों से छलावा हो रहा है !
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| 55 |
| 12 May 2010 |
माहौल में कोई तो ज़हर घोल रहा है !
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| 85 |
| 12 May 2010 |
बदलने हैं न यूँ हालात प्यारे !
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| 77 |
| 12 May 2010 |
तसव्वुर आप का दिल से परे पल भर नहीं जाता !
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| 56 |
| 11 May 2010 |
हो सके , खंजर मुलायम लो मियाँ !
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| 76 |
| 11 May 2010 |
गुनाहों की खड़ी मीलों फसल है !
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| 56 |
| 09 May 2010 |
माँ ने मेरे मकान को मधुबन किये रखा !
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| 88 |
| 09 May 2010 |
कुरेदा सुख की सतहों को तो नीचे ग़म निकल आये !
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| 86 |
| 09 May 2010 |
रहो ढूढ़ते बस बिपाशा नहीं !
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| 88 |
| 08 May 2010 |
नए विहान की प्रतीक्षा का धर्म
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| 61 |
| 08 May 2010 |
मिथ्या है महनीय हुई,सत्य गए हो भूरे हैं !
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| 65 |
| 08 May 2010 |
तेरे चरणों को छूकर मैं जन्म जन्म तक धन्य हुआ !(On Mother’s Day)
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| 70 |
| 07 May 2010 |
क़र्ज़ साँसों का कहाँ तक भुगतें,हम इसे और उठाने से रहे !
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| 92 |
| 06 May 2010 |
देखते हैं पार्थ सब लाचार से !
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| 80 |
| 06 May 2010 |
गली गली गौतम मिलते हैं !
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| 66 |
| 05 May 2010 |
एक इक शय ने पलट कर है पुकारा हमको !
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| 79 |
| 05 May 2010 |
ज़ख्म हैं रूह का मरहम जानां !
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| 84 |
| 05 May 2010 |
मन में जानेमन तुम्हारी याद है !
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| 79 |
| 04 May 2010 |
जानवर बदनाम हैं ज्यादा भले !
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| 75 |
| 04 May 2010 |
पीर के तपते हुए बैशाख में !
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| 88 |
| 04 May 2010 |
ये तस्वीर तेरी बहुत दिलनशीं है !
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| 72 |
| 03 May 2010 |
किसकी मजाल उनसे जो आँखें मिला सके !
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| 62 |
| 03 May 2010 |
छूट गया उम्मीद का दामन, अब बिलकुल तनहा हूँ मैं !
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| 62 |
| 02 May 2010 |
बुझते हुए चेहरों पर रूहों के बियाबां हैं !
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| 68 |
| 02 May 2010 |
शजर बहार से मांगे तो और क्या मांगे !
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| 77 |
| 01 May 2010 |
तेरी खुशियाँ ही सदा मांगी थी.
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| 69 |
| 01 May 2010 |
Passion For Poetry — पद्य पिपासा.
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| 96 |
| 01 May 2010 |
देख दिन रात संवरने वाले !
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| 68 |
| 24 Apr 2010 |
हर मुखौटे तले एक सी सूरतें !
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| 76 |
| 24 Apr 2010 |
अब तो आदाब कुछ मयक़दे के बदल !
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| 84 |
| 23 Apr 2010 |
सहमी सहमी सी सबा गुजरी है !
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| 79 |
| 23 Apr 2010 |
गुम्बद ज्यों के त्यों खड़े लगे नींव को चोट .
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| 90 |
| 23 Apr 2010 |
हर नशा एक दिन उतरता है !
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| 137 |
| 22 Apr 2010 |
हर नफस है उसी का असर देखना !
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| 75 |
| 22 Apr 2010 |
गुल क्यों हैं सब उदास कहाँ दिलकशी गयी !
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| 65 |
| 22 Apr 2010 |
दिल पे जो बीत रहा है जानां !
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| 65 |
| 21 Apr 2010 |
जफा है या कि वफ़ा मैं ये जानता भी नहीं.
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| 86 |
| 21 Apr 2010 |
कोई रिश्ता रहे कायम जानां
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| 67 |
| 20 Apr 2010 |
रात डंसती रही रात भर
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| 95 |
| 20 Apr 2010 |
रोज़ मुखौटे नए नए मिलते मुंह पर डाले लोग
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| 77 |
| 18 Apr 2010 |
हंसी की कलम लग गयी है आंसू के पेड़ में,
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| 89 |
| 18 Apr 2010 |
क़ह्क़हों के कब्रिस्तान में
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| 61 |
| 17 Apr 2010 |
ज़ाहिरा सब क़सीदे ही पढ़ते रहे !
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| 64 |
| 17 Apr 2010 |
अजब खौफ दिल में समाने लगे हैं !
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| 65 |
| 16 Apr 2010 |
हमको बिलकुल ध्यान नहीं था !
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| 80 |
| 16 Apr 2010 |
रोटी रोज़ जुटाना मुश्किल होता है !
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| 88 |
| 15 Apr 2010 |
तेरी अंजुमन में क्या क्या न सितम पड़े हैं सहने !
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| 74 |
| 15 Apr 2010 |
ह्रदय की मात्र कामना न रात ये समाप्त हो
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| 77 |
| 14 Apr 2010 |
तो सूरत तुम्हारी अजानी सी क्यों है
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| 82 |
| 14 Apr 2010 |
दस्तकें सब बे-असर होने लगीं !
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| 81 |
| 14 Apr 2010 |
कोशिश न कोई कम की
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| 83 |
| 13 Apr 2010 |
न करो उमीदे साया,वो कोई शजर नहीं है !
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| 94 |
| 12 Apr 2010 |
अच्छी भली कहानी का वो,त्रासद उपसंहार करेंगे !
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| 75 |
| 12 Apr 2010 |
जिसपे रो लें ,कोई शाना ही नहीं
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| 73 |
| 11 Apr 2010 |
तुमको दरो दीवार ने पहचान लिया है
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| 87 |
| 11 Apr 2010 |
जां निसारी के दावे अलग,और मरना अलग बात है
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| 74 |
| 10 Apr 2010 |
आज लौटे हैं वही दर्द पुराना लेकर !
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| 88 |
| 10 Apr 2010 |
कलदारों से खेल रहे हैं, हैं खुद खोटे पैसे लोग !
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| 97 |
| 10 Apr 2010 |
हाशिये, हाशिये, सिर्फ हैं हाशिये !
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| 88 |
| 09 Apr 2010 |
कुछ तो सय्याद में बात थी,पास सब अंदलीब आ गए !
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| 84 |
| 08 Apr 2010 |
अधरों की बंकिम मुस्कानें मन में मदिरा घोल रहीं हैं !
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| 98 |
| 08 Apr 2010 |
तू मेरे अक्स में समाया है !
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| 105 |
| 06 Apr 2010 |
ये कौन अजनबी है,कई लोग कह गए !
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| 127 |
| 05 Apr 2010 |
कैसी कैसी सीतायें सब रावण हरता जाता है !
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| 92 |
| 04 Apr 2010 |
तू न हो तो तबस्सुम की फिर ,मेरे होंठो से पटती नहीं !
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| 105 |
| 04 Apr 2010 |
ज़िन्दगी की थकन को सहारे मिले!
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| 88 |
| 03 Apr 2010 |
धड़कन धड़कन वक़्त के हाथों जैसे चलीं गुलेलें हैं !
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| 106 |
| 03 Apr 2010 |
ख्वाबों को अभी आँख में पलना नहीं आया !
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| 91 |
| 02 Apr 2010 |
अब तो टानिक हमें पिला कोई.
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| 87 |
| 02 Apr 2010 |
वो ग़लत समझ रहे हैं कि दुआ में दम नहीं है !
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| 153 |
| 02 Apr 2010 |
वही क़ातिल हमें ठहरा रहा है !
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| 114 |
| 01 Apr 2010 |
फलसफे बे असर हो गए
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| 93 |
| 01 Apr 2010 |
अक्सर प्यासी ही मिलती हैं आँखें पानी पानी सी.
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| 94 |
| 31 Mar 2010 |
ये मेरी वेदना का राशिफल है !
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| 110 |
| 31 Mar 2010 |
जब कहानी में मोड़ आया है.
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| 67 |
| 31 Mar 2010 |
सूरज भी चेहरा जो देखे सिर्फ दिखेगी छाया.
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| 97 |
| 30 Mar 2010 |
आजीवन फिर तपना होगा
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| 122 |
| 30 Mar 2010 |
शहर दर शहर भटकने की सजा पाई है !
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| 79 |
| 29 Mar 2010 |
सहमीं घुटनों में सर छुपा कलमें.
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| 90 |
| 29 Mar 2010 |
किसने संध्या की आँखों में रंग भरे श्यामल रतनारे !
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| 82 |
| 29 Mar 2010 |
आकाश की किताब खुली पड़ी है,
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| 115 |
| 28 Mar 2010 |
इन निगाहों में तुम आ गए
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| 73 |
| 27 Mar 2010 |
मगर निगाह है नम क्या करूँ इस आदत का !
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| 91 |
| 27 Mar 2010 |
नश्शा ही निराला है तुम प्यार तो कर देखो !
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| 87 |
| 20 Mar 2010 |
बिछ गए लोग गोटियाँ बन कर !
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| 90 |
| 13 Mar 2010 |
चलो कहीं दिल और लगाओ,उनको कब फुर्सत मिलती है !
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| 97 |
| 13 Mar 2010 |
चमन में आके तुम्हारी मिसाल देते हैं !
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| 104 |
| 12 Mar 2010 |
जब निकले वो शहर सजाने !
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| 83 |
| 12 Mar 2010 |
बादलों में ढंकी चांदनी !
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| 103 |
| 12 Mar 2010 |
हैं बहिरंतर क्षत विक्षत हम !
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| 100 |
| 12 Mar 2010 |
अंगरागों से चेहरे मले जा रहे !
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| 119 |
| 11 Mar 2010 |
अर्थ के अनर्थ देखिये !
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| 111 |
| 11 Mar 2010 |
नक्श नज़र आते जब तेरे चंदा की रानाई में !
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| 105 |
| 10 Mar 2010 |
यहाँ इंसान कठपुतली बने हैं !
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| 82 |
| 10 Mar 2010 |
गैर को प्यार कहाँ करते हैं !
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| 86 |
| 10 Mar 2010 |
मुल्क को चद्दर बना बैठे हैं लोग.
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| 103 |
| 09 Mar 2010 |
खेल जीत का आगे ही है, जंग अभी है ज़ारी जी.
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| 110 |
| 09 Mar 2010 |
न चाहत में देखी ख़ुशी आप ने
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| 96 |
| 09 Mar 2010 |
अच्छी मजलिस में आये हम,स्वर गूंगे, श्रोता बहरे हैं.
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| 105 |
| 08 Mar 2010 |
झुकता है आकाश, बढ़ा कर हाथ रौशनी बीनेंगे.!
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| 115 |
| 08 Mar 2010 |
हालाते मुल्क पर ये भला तब्सिरा रहा !
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| 83 |
| 08 Mar 2010 |
कुछ दिल गुजिश्त अपनी बतानी शुरू करें !
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| 75 |
| 08 Mar 2010 |
मगर हम जुर्म की औरों पे तोहमत मढ़ नहीं पाए.
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| 80 |
| 07 Mar 2010 |
गुलशन गुलशन घूम रहे जो सब तेरे दीवाने हैं.
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| 69 |
| 07 Mar 2010 |
फ़क़त उम्र भर पापड बेले.!
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| 113 |
| 07 Mar 2010 |
यूँ न चुटकी में कोई फ़न आये.!
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| 82 |
| 06 Mar 2010 |
इंगितों से लरजायीं डोरियाँ किसी ने !
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| 81 |
| 06 Mar 2010 |
बजेंगे घने खूब थोथे चने !
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| 95 |
| 05 Mar 2010 |
सखी कैसा सिसकता है बरसती सांझ का पानी. !
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| 112 |
| 04 Mar 2010 |
आये ना घनश्याम सखी री !
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| 126 |
| 04 Mar 2010 |
सीता न सिर्फ सोन हिरन से छली गयी !
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| 96 |
| 04 Mar 2010 |
कुछ तो कीजे कि ये मौसम बदले.!
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| 92 |
| 03 Mar 2010 |
आईना ले के हम सोचते रह गए.!
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| 103 |
| 03 Mar 2010 |
हम न यूँ ही फ़क़त बदगुमां हो गए !
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| 106 |
| 03 Mar 2010 |
पर मिले सबसे टूट कर हम भी !
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| 123 |
| 02 Mar 2010 |
जोगीड़ा सारा रा रा !
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| 100 |
| 02 Mar 2010 |
होलियों में याद आते हैं, भौजियों को हाथ बबुआ के !
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| 88 |
| 01 Mar 2010 |
बता देंगे बातें चलो नैन कारे !
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| 105 |
| 28 Feb 2010 |
धर्मराज हैं द्यूतरत , रहे शकुनि सब जीत !
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| 142 |
| 27 Feb 2010 |
चला सजनी मूंदा अंखिया पिया अब न अइहें !
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| 130 |
| 27 Feb 2010 |
दर्पण अन्धराया एक रहा,वो भी गुगली से चार प्रभो.
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| 113 |
| 27 Feb 2010 |
खुद से भी रहने लगे नाराज़ हम !
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| 103 |
| 27 Feb 2010 |
आईना देखते ही गए हम जो डर !
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| 87 |
| 26 Feb 2010 |
ज़ज्बातों के पौधे कोमल, मन की मिटटी को नम रखिये.
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| 117 |
| 25 Feb 2010 |
झील में देखता आईना रात भर !
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| 88 |
| 25 Feb 2010 |
हक़ से लेकिन कोई गाफिल ना रहा !
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| 94 |
| 25 Feb 2010 |
क्या करेंगे तेरे प्यार की वो कदर !
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| 97 |
| 24 Feb 2010 |
दिल रख दिया क़दमों में ज़रो-माल न देखे !
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| 113 |
| 24 Feb 2010 |
कर रहे हैं बात सब तलवार से !
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| 103 |
| 24 Feb 2010 |
हम हुए भी तो क्यों फ़िज़ूल अलग !
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| 119 |
| 23 Feb 2010 |
गीत रचे उस गीतकार ने मैं गुनगुना रहा हूँ !
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| 96 |
| 23 Feb 2010 |
रुख्सारे गुल पे लाजिम है ताज़गी का आलम
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| 82 |
| 22 Feb 2010 |
छल गए बहुरूपिये से क्षण.!
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| 100 |
| 22 Feb 2010 |
उसके हाथों में हैं डोरियाँ,पुतलियाँ मग्न हैं नाच में !
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| 106 |
| 22 Feb 2010 |
हम थे चाहत के मुजरिम मगर,जुर्म ये भी न आया हमें !
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| 85 |
| 21 Feb 2010 |
छाया के गीत बहुत दीर्घ हुए जाते है
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| 90 |
| 21 Feb 2010 |
भुज मृणालों में तुम्हारी बद्ध मैं खोया हुआ सा.
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| 128 |
| 21 Feb 2010 |
जितने गुल खिलने थे अब तक, खिल लिए !
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| 107 |
| 20 Feb 2010 |
यहाँ तो फूल सब कुम्हला चुके हैं !
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| 105 |
| 19 Feb 2010 |
मिट्टी सबकी एक है सूरत भले अनेक.
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| 149 |
| 19 Feb 2010 |
गुरुरे हुस्न तो कब कम हुआ है !
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| 86 |
| 19 Feb 2010 |
स्वर तुम्हारे नहीं पा सकी,गीतिका रह गयी मौन ही !
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| 93 |
| 18 Feb 2010 |
फिर भी क्यों हम पर नज़र होती नहीं!
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| 100 |
| 18 Feb 2010 |
तुझको ऐ दिल अभी संभलना था !
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| 100 |
| 18 Feb 2010 |
रच दो जादू अँगुलियों से तन मेरा चन्दन हो जाए !
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| 100 |
| 17 Feb 2010 |
छोड़ कर इश्क का चलन प्यारे
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| 79 |
| 17 Feb 2010 |
देख कर जेन नेक्स्ट को ऐसे रिदम की ताल में
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| 94 |
| 16 Feb 2010 |
आप थे इस क़दर खूबसूरत कहाँ !
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| 99 |
| 16 Feb 2010 |
पिलाने का अजब ही ढब रखा है !
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| 105 |
| 15 Feb 2010 |
सतरें पड़ीं है फूल पे खुशबू के पांव से
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| 108 |
| 15 Feb 2010 |
यही तो हासिल है ज़िन्दगी का लगा रहेगा ये जीना मरना !
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| 99 |
| 14 Feb 2010 |
रुदादे इश्क छोड़ कोई और बात कर !
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| 95 |
| 14 Feb 2010 |
सारे फ़िदा ए यार तो दुनिया में खो गए !
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| 77 |
| 13 Feb 2010 |
दुआ ये करो सब्र दिल को मिले,दिया रब ने यूँ भी मियां है बहुत
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| 113 |
| 13 Feb 2010 |
डार्लिंग डार्लिंग रट रहे गलती मगर न दाल
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| 120 |
| 13 Feb 2010 |
हमारे पांव थे शबनम के फूल फूल चले
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| 107 |
| 12 Feb 2010 |
कहीं रहोगे मेरे दिल की जान लोगे तुम
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| 103 |
| 12 Feb 2010 |
रस्मे उल्फत निभाई यूँ मैनें , चुप थे,क्या उसको बेवफा कहते !
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| 105 |
| 12 Feb 2010 |
हुस्न का है तेरे जवाब कहाँ !
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| 111 |
| 10 Feb 2010 |
कल पर रख दो सब मनुहारें,आज मेरा मन ठीक नहीं है !
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| 113 |
| 10 Feb 2010 |
रात के हामी हजारों हो गए,क्या करे सूरज बिचारा देखना !
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| 90 |
| 09 Feb 2010 |
अजब दोस्त एक आज हमको मिला है
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| 128 |
| 09 Feb 2010 |
जो कि पुराने ज़ख्म कुरेदें,वो अफ़साने क्यों पढ़ते हो !
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| 127 |
| 08 Feb 2010 |
बदन के पोर अब भी रात भर अपने दहकते हैं !
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| 117 |
| 08 Feb 2010 |
बता तू ही अब इस पर किस तरह लिक्खूं ग़ज़ल प्यारे !
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| 160 |
| 07 Feb 2010 |
आस्तीनों में छुरी रख मुंह में रखना राम राम
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| 110 |
| 06 Feb 2010 |
खिल उठीं आँखें तुम्हारी हैं कमल सी !
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| 115 |
| 06 Feb 2010 |
मेरी आँखों में विम्ब निहार,स्वयं पर सम्मोहित सी तुम !
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| 149 |
| 05 Feb 2010 |
गीत गुमनाम हैं गालियाँ पोपुलर,क्या कहें दोस्तों वक़्त के फेर हैं !
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| 140 |
| 05 Feb 2010 |
ग़म की शाम अँधेरी आई, यादों के जुगनू आये !
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| 116 |
| 05 Feb 2010 |
देह का दोहा हुआ संपूर्ण है, साँस करती साँस से संवाद है !
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| 140 |
| 04 Feb 2010 |
जो हाथ न आया हाथ मेरे , बस उसके लिए तड़पना था.
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|
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| 140 |
| 04 Feb 2010 |
कहीं भी जाएँ तुम्हारी गली में फिरते हैं.!२!
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| 131 |
| 04 Feb 2010 |
जो बख्शता है तो दुनिया हमें खराब न दे !
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| 108 |
| 03 Feb 2010 |
हुए लफ्ज़ लफ्ज़ हैं आईने मेरे सब सुखन हैं संवर गए !
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| 128 |
| 03 Feb 2010 |
धर्म ध्वंस के अब पर्याय,ईश्वर अल्ला सब निरुपाय
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| 179 |
| 02 Feb 2010 |
अभी न इतनी ज़ल्दी हार , चादर भर तो पांव पसार !
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| 139 |
| 02 Feb 2010 |
ऐ काश तू ही मिले हासिल सफ़र जानां !
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| 125 |
| 02 Feb 2010 |
रात भर देखने की हसरत की !
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| 115 |
| 01 Feb 2010 |
ये और बात है अहसान सब भुलाते हैं !
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| 107 |
| 01 Feb 2010 |
हम क्या हैं पूछा सबने, कीमत पर पहचानी कम !
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| 127 |
| 31 Jan 2010 |
तुम्हारी लम्हा ब लम्हा बस आरज़ू की है !
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| 112 |
| 30 Jan 2010 |
चंद लाइनें बस कहनी थीं,
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| 174 |
| 30 Jan 2010 |
खेत बने कालोनियां सूखे सारे ताल !
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| 323 |
| 29 Jan 2010 |
हाले दिल जानता है सब साक़ी !
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| 114 |
| 29 Jan 2010 |
इल्तिजा का जवाब मांगें वो और निगाहों से लाजवाब करें !
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| 107 |
| 29 Jan 2010 |
हमें भी प्यार से देखा तो था कभी जानां
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| 120 |
| 28 Jan 2010 |
मुझे खुशबुओं से नवाज़ दे
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| 106 |
| 28 Jan 2010 |
शिद्दते दर्द कभी कम न हुई
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| 110 |
| 28 Jan 2010 |
शीरीं लब मीठी बातों में तल्ख़ कहानी भूल गए हैं !
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| 130 |
| 27 Jan 2010 |
बातें तो बेकार की बावन हाथ जुबान
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| 140 |
| 27 Jan 2010 |
माँ के पैरों में जो जन्नत देखी !
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| 114 |
| 27 Jan 2010 |
दोऊ हाथ बटोरिये जितना सकें बटोर !
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| 117 |
| 26 Jan 2010 |
तुम्हे पात पीले पसंद आ रहे हैं !
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| 91 |
| 26 Jan 2010 |
सुना है वो जालिम संवरने लगा है !
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| 125 |
| 25 Jan 2010 |
ज़ुल्फ़ बिखराए रुख पे आये वो
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| 105 |
| 25 Jan 2010 |
सेवा का व्रत ले किया मेवे का व्यापार
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| 94 |
| 25 Jan 2010 |
तुम्हे ही उज्र रहा साथ साथ चलने में !
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| 91 |
| 15 Jan 2010 |
गम से देनी निजात थी सबको
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| 130 |
| 15 Jan 2010 |
वर्ना तो ये हमदर्दी बस एक नुमाईश है !
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| 112 |
| 15 Jan 2010 |
इस गुल में भी है खुशबू,सीने पे सजाओ भी !
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| 76 |
| 14 Jan 2010 |
ये उसकी नज़र, उसकी नज़र, उसकी नज़र है !
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| 161 |
| 13 Jan 2010 |
तुमसे तो निभ चुकी कि तुम्हे वक़्त ही नहीं
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| 150 |
| 13 Jan 2010 |
ऐसा नशा न आया कभी पहले साक़िया
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| 183 |
| 12 Jan 2010 |
उनको जब से संवरते देखा है !
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| 119 |
| 11 Jan 2010 |
डायनासोर बिला गए बचे फ़क़त काक्रोच !
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| 157 |
| 08 Jan 2010 |
फूल खिले गुलदान में सूनी वन में शाख!
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| 138 |
| 07 Jan 2010 |
लडूं मैं जग से कभी कर सका न साहस मैं !
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| 150 |
| 07 Jan 2010 |
नींद अगर पहले खुल जाती ,क्यों सपने साकार न होते !
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| 156 |
| 06 Jan 2010 |
नादिम हुए हैं तुझको सुना कर के हाले दिल !
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| 147 |
| 04 Jan 2010 |
जो हमारा नहीं हो सका ,बस उसे याद करते रहे !
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| 142 |
| 04 Jan 2010 |
रिफाक़त की ये कीमत मांगते हैं
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| 126 |
| 03 Jan 2010 |
रौशनी की तो वैसे लकीरें हुईं
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| 118 |
| 03 Jan 2010 |
मुझे ही लोग दीवाना कहेंगे !
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| 126 |
| 02 Jan 2010 |
तुम्हारी याद, हरसिंगार जैसे
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| 134 |
| 02 Jan 2010 |
हर कोयला सुनहरा है !
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| 119 |
| 01 Jan 2010 |
हमसफर तो थे, हम ख्याल न थे
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| 177 |
| 01 Jan 2010 |
खुद से छिपना मगर असंभव है !
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| 152 |
| 31 Dec 2009 |
शीरीं ने भी बदल है लिया नुक्ता -ए -नज़र
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| 175 |
| 31 Dec 2009 |
ये शहर है हसीन ख्वाबों का
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| 139 |
| 30 Dec 2009 |
दिल को दिल से मिलेगी राह ज़रूर
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| 158 |
| 30 Dec 2009 |
वो तो चेहरा तलक भी भूल गया !
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| 156 |
| 29 Dec 2009 |
उसको देखे तो एक उमर गुजरी
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| 219 |
| 29 Dec 2009 |
सबकी नज़रों में मत उतर इतना !
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| 143 |
| 29 Dec 2009 |
अपनी नज़रों में कहाँ तक गिरते !
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| 111 |
| 25 Dec 2009 |
उसकी नज़रों ने है बख्शा किसको
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| 192 |
| 24 Dec 2009 |
ये अजगर आदमी निगले हुए हैं !!
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| 189 |
| 24 Dec 2009 |
ज़िन्दगी यूँ न हार सहरा में !
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| 185 |
| 24 Dec 2009 |
उसके रुखसार की घुली रंगत मेरी गुलनार हो गयीं शामें !
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| 166 |
| 23 Dec 2009 |
जब से उनकी नज़र छू गयी ज़िन्दगी मदमयी हो गयी !
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| 202 |
| 23 Dec 2009 |
दाम अगर देने का दम हो, हिलता है अब हर ध्रुव तारा !
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| 162 |
| 22 Dec 2009 |
आखिर वो शोख दिल का ही मेहमान हो गया !
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| 147 |
| 22 Dec 2009 |
उसके हँसते ही सारा चमन खिल उठा
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| 136 |
| 21 Dec 2009 |
हो मुबारक हो मुबारक ये नया साल तुम्हें !!
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| 365 |
| 21 Dec 2009 |
मेरी आँखों में मगर ख्वाब तेरे पलते हैं !
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| 160 |
| 20 Dec 2009 |
जिसे वफ़ा का मुजस्सिम बदल समझता था
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| 130 |
| 20 Dec 2009 |
तेरे प्यार के ये निशान थे जो छुए गए तो चमक गए
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| 142 |
| 19 Dec 2009 |
बेहुनर आज मकबूल हैं
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| 150 |
| 19 Dec 2009 |
सारे खूबरू शौहर रहे उनके !
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| 126 |
| 19 Dec 2009 |
फिर भी बैठे हुए हैं दिल थामे
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| 124 |
| 18 Dec 2009 |
ये नमी काट डालेगी दिल
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| 133 |
| 18 Dec 2009 |
पास रख कर तेरे प्यार का उम्र भर हम सुलगते रहे
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| 166 |
| 17 Dec 2009 |
गारंटी
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| 161 |
| 17 Dec 2009 |
“चोरी का कुत्ता न घर का न घाट का’”
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| 171 |
| 16 Dec 2009 |
उसका दामन ढलकने लगा
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| 164 |
| 16 Dec 2009 |
तुम्हीं से प्यार होना लाजमी था?
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| 162 |
| 15 Dec 2009 |
रौशनी थी पराये घर की वो
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| 134 |
| 15 Dec 2009 |
ज़मीर बेच रहे थे सभी मैं लौट आया
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| 151 |
| 14 Dec 2009 |
आशना इस तरह मिला कोई
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| 187 |
| 30 Nov 2009 |
मुद्रा की आकर्षक मुद्रा पर महफ़िल बेहोश
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| 177 |
| 30 Nov 2009 |
दफ्तर विचित्र देश है दफ्तर विचित्र व्यापार है.
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| 177 |
| 28 Nov 2009 |
उसकी आँखों को ही चल राह का तारा कर लें
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| 167 |
| 27 Nov 2009 |
है आंसुओं में गूँधी अहसास की ये मिटटी
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| 171 |
| 26 Nov 2009 |
तू है ज़मीन तेरी हदें हैं बंधीं हुईं
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| 187 |
| 26 Nov 2009 |
भर न मुट्ठी में जान कर जुगनू
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| 191 |
| 25 Nov 2009 |
फलक के सितारों से बहलें भी कब तक
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| 164 |
| 25 Nov 2009 |
सखि री साँझ बहुत मन साले
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| 212 |
| 24 Nov 2009 |
मुखबिरी अश्कों ने दर्दे दिल की की
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| 216 |
| 24 Nov 2009 |
श्री कृष्ण वंदना
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| 220 |
| 24 Nov 2009 |
उदास यादों के झुरमुटों में वो झिलमिलाती शमा सा चेहरा
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| 168 |
| 23 Nov 2009 |
मेहमान थे जो दिल के, सभी घर बदल गए
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| 181 |
| 23 Nov 2009 |
सखि पोंछ नयन वे आते हैं
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| 171 |
| 22 Nov 2009 |
उजड़ गए नींदों के मधुबन मुरझाये ख्वाबों के फूल
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| 197 |
| 14 Nov 2009 |
खुशबुएँ छोड़ आयी कहाँ दोस्तों
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| 184 |
| 14 Nov 2009 |
mchhali ko aaj fir badi machhali nigal gayee/मछली को आज फिर बड़ी मछली निगल गयी
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| 193 |
| 14 Nov 2009 |
Raat bhar meghna madhu chhalakti rahi/ रात भर मेघना मधु छलकती रही
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| 198 |
| 14 Nov 2009 |
aap chup ho gaye bolte bolte/ आप चुप हो गए बोलते बोलते .
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| 143 |
| 14 Nov 2009 |
धुआं तमाम , रौशनी है कम
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| 165 |
| 14 Nov 2009 |
पंछी में अभी कुव्वते परवाज है बहुत
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| 144 |
| 14 Nov 2009 |
वो लौट के न आएगा अब रास्ता न देख
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| 181 |
| 13 Nov 2009 |
बर्बरीक हतबुद्धि श्रृंग से हर अवलोके धर्म क्षेत्र के धर्म युद्ध के धंधे धोखे
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| 155 |
| 13 Nov 2009 |
उसकी आँखों ने कुछ कहा तो है
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| 157 |
| 13 Nov 2009 |
फ़रिश्ता आएगा कोई न आसमानों से
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| 155 |
| 13 Nov 2009 |
इधर भी तिश्ना लबों का हुजूम बेकल है
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| 143 |
| 12 Nov 2009 |
mat chheeno mujhse mere swar/मत छीनो मुझसे मेरे स्वर
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| 165 |
| 10 Nov 2009 |
निकल तो जाऊँ ज़रा जात के हिसारों से
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| 210 |
| 10 Nov 2009 |
झर पड़ेंगे अंधे जुगनू लाख दामन में अभी
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| 167 |
| 08 Nov 2009 |
puja krenege aap ko patthar bana ke log
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| 215 |
| 08 Nov 2009 |
ana ko itni bulundi pe le gaye saare
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| 192 |
| 08 Nov 2009 |
rahin suraten to nazar me bahut
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| 221 |
| 06 Nov 2009 |
shiv rupi yeh ped kahava
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| 222 |
| 06 Nov 2009 |
dhai aakhar nahin padh saka
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| 184 |
| 06 Nov 2009 |
गिरी पंखुडी जो किताब से तेरी याद फिर से जगा गयी
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| 171 |
| 05 Nov 2009 |
अभिमन्युओं के खून से सब हाथ सन गए
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| 180 |
| 05 Nov 2009 |
चंद लम्हात में हो जायेगी रुदाद तमाम
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| 163 |
| 04 Nov 2009 |
unhin ka daamne shaffaq daag daag mila
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| 165 |
| 03 Nov 2009 |
मैं भी शायद संवर गया होता
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| 97 |
| 02 Nov 2009 |
मैं हूँ मुन्तजिर तेरे लम्स का कभी प्यार से तो पुकार ले
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| 189 |
| 31 Oct 2009 |
sabke seene hi bane sar dekhe
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| 189 |
| 30 Oct 2009 |
junoon samajh ke jise
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| 202 |
| 29 Oct 2009 |
aap jayen na dil tod kar
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| 147 |
| 29 Oct 2009 |
ye bisaat hai bade khel ki
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| 253 |
| 27 Oct 2009 |
chidian kahan rahen ab jaake
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| 150 |
| 26 Oct 2009 |
ajnabiyat hui tarze-nau
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| 195 |
| 24 Oct 2009 |
धुंध छाई है तेरी यादों की कुछ भी दिखता नहीं सिवा तेरे
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| 234 |
| 24 Oct 2009 |
gair ke ashq se num na hon jiski aankhe vo insaan kya
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| 181 |
| 23 Oct 2009 |
कहाँ खो गए काफिले रौशनी के
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| 265 |
| 21 Oct 2009 |
सवारूँ किस तरह दुनिया , जिधर देखो कमी निकले
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| 130 |
| 21 Oct 2009 |
इनसे रौनक बहारों की है वरना फूलों की मुस्कान क्या
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| 262 |
| 20 Oct 2009 |
उसने देखा नज़र भर मुझे
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| 229 |
| 14 Oct 2009 |
dhar talwar ki parakhne me ja b ja dekh kitne sar bikhare
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| 187 |
| 14 Oct 2009 |
यूँ परिंदों के सारे घर बिखरे
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| 286 |