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About: siddhanathsingh

siddha Nath Singh Full Name: siddha Nath Singh

Details:
I am an engineer by training and sahitya premi by nature. I started writing when 16 years of age and have reached to the present level of proficiency till now. It is for the "kavya rasiks" to judge how far i have reached. "benoor nargis chaman mein deedavar ki talash mein hun, I am also available at my blog site -siddhanathsingh.blogspot.com- s.n.singh

Poems by siddhanathsingh

Date Title     Comments Views
03 Sep 2010 पुरबा बहेले सिवनवां 0 10
03 Sep 2010 कहते कहते कहानी न जाये बदल. 0 5
02 Sep 2010 अब छोडिये वफ़ा का तमाशा न कीजिये 4 14
02 Sep 2010 वो खामोश है पर बड़ा पुर तरन्नुम 4 7
01 Sep 2010 कहीं दुनिया तुम्हारी है, कहीं दुनिया हमारी है 2 17
30 Aug 2010 तुम्हारे साथ चलना था तुम्हारे साथ चलते हैं. 10 23
29 Aug 2010 तुम ही कहो कि उससे कोई जा के क्या मिले 6 15
29 Aug 2010 उदास यादों के झुरमुटों में वो झिलमिलाता शमा सा चेहरा . 4 12
29 Aug 2010 सुन लीं बात हमार बलमवां 5 11
28 Aug 2010 देश द्वेष का हो रहा नित्य प्राय पर्याय, 4 21
28 Aug 2010 यादों में वो ज़रूर सुब्हो शाम आएगा 4 15
28 Aug 2010 अच्छा सफ़र था, पीर मिले ,देवता मिले 10 13
26 Aug 2010 यूँ न बर्बाद हम रहे होते 8 25
26 Aug 2010 जी तो हैं हम रहे ज़िन्दगी है कहाँ 10 28
26 Aug 2010 प्यार करके भुला नहीं देते 2 25
25 Aug 2010 यूँ छुप के तो बर्बाद मेरी ईद न करिए. 6 34
25 Aug 2010 ज़िन्दगी ने सलीक़े सिखाये कई, 6 29
24 Aug 2010 ज़िन्दगी की न जिद्दो जहद कम हुई. 9 35
24 Aug 2010 जिधर है जोर हवाओं का, मुड़ रहा हूँ मैं. 8 40
23 Aug 2010 भुलाने में तुझको ज़माने लगेंगे. 6 36
22 Aug 2010 कौन अजब जादू है नैन में तुम्हारे 4 30
22 Aug 2010 खो गए दम ब दम आदमी 2 46
21 Aug 2010 जिस आदमी ने हमें आदमी बनाया था, 4 20
21 Aug 2010 आदमी को न दे अहमियत आदमी. 4 17
21 Aug 2010 मेहरबां आदमी मातहत आदमी 8 35
18 Aug 2010 एक समंदर से गुज़रे मगर , उम्र भर लोग प्यासे रहे. 10 44
17 Aug 2010 ख्वाबों की असलियत को परखते हुए जिए. 13 49
16 Aug 2010 कुछ शख्स ज़िन्दगी में होते बहुत अहम हैं. 8 39
16 Aug 2010 उससे बड़ा मदारी है कौन दूसरा ,वो 4 29
15 Aug 2010 जो स्वतन्त्र देश को बनाने पर तुले हैं शव तंत्र ? 6 37
15 Aug 2010 आये जो हो शहर में, खुद को बचा के रखना. 4 38
14 Aug 2010 अब तो अपनी नज़र बस सितारों पे है. 2 34
14 Aug 2010 प्यास दीदार की अनबुझी आज भी. 4 28
14 Aug 2010 अब तो अपनी नज़र बस सितारों पे है. 4 30
13 Aug 2010 आओ शजर ये सींचें सम्हालें बड़ा करें . 8 42
11 Aug 2010 दस्तकें बेज़ुबां हो गयीं. 4 31
10 Aug 2010 आसरा दे के अब मुकरते हैं 5 31
10 Aug 2010 बैठे हैं बज़्म में सब चुप सी लगी हुई है. 4 36
09 Aug 2010 सहलाती हैं पलकें मेरी ख्वाबों के परों को. 13 37
09 Aug 2010 नाखुदाई के इम्तिहाँ ठहरे. 4 24
08 Aug 2010 तेरे दर से जो लौट कर आये. 8 38
08 Aug 2010 दो मुक्तक 8 39
08 Aug 2010 जब से हैं हम किसी के हुए. 8 29
07 Aug 2010 सबसे कहते भी हम तो क्या कहते 8 40
07 Aug 2010 जब भी देखा नया नया सा लगा. 6 42
06 Aug 2010 सपने तमाम टूटे नींदें तमाम खोयीं. 6 33
06 Aug 2010 जिसे मंजरे आम पर कौंधना था,बनी बर्क जीनत वो जलसाघरों की. 10 33
05 Aug 2010 गज़ब हाल देखे हैं दीदावरों के. 4 36
05 Aug 2010 चार दिन चांदनी के रहे फिर अँधेरे यथावत हुए. 4 33
04 Aug 2010 अब न साहिल न दरिया रहा 11 40
04 Aug 2010 ये सोचते हैं अकेले कहाँ गुज़र होगी. 6 23
03 Aug 2010 बिछुड़ गए तो तुझे फिर न देख पाए हम. 16 37
03 Aug 2010 हैं कहती साँसें सफ़र यहीं तक. 8 35
02 Aug 2010 गड्ढे बड़े बड़े हैं 8 37
02 Aug 2010 जब से बीवी मियाँ हो गए 6 36
01 Aug 2010 देश अपना है, घर अपना है सभी हैं अपने, 14 61
01 Aug 2010 अभी से हार जाना क्या जंचेगा 8 30
01 Aug 2010 वो अपने आप में सिमटा दिखाई देता है. 8 34
31 Jul 2010 पग तरक्की के बढ़ने लगे, 6 46
31 Jul 2010 हर बार शुरू होता वैसे ही फ़साना है, 8 42
31 Jul 2010 छेड़े हैं दिल के तार तुम्हारी निगाह ने. 8 40
30 Jul 2010 अहसासों पर बर्फ पड़ी है 8 56
30 Jul 2010 क़दम गए थक तो हम भी लाचार हुए 6 59
29 Jul 2010 ख्वाब जैसी गुज़रती रही ज़िन्दगी 4 49
29 Jul 2010 आस्तीनें कुछ और कहती हैं,और दावा है बेगुनाही का. 6 61
29 Jul 2010 दोपहरी में जीवन की क्यों काले बादल छाये हैं, 6 63
27 Jul 2010 किससे मिलिए किसे मना कीजे 4 59
27 Jul 2010 भोर सुहानी आँखें मलती अलसाई अलसाई सी 6 53
25 Jul 2010 शहर में घर घर दग़े बहुत हैं 6 71
24 Jul 2010 दर्द इतने दिए आप ने अब सुकूं भी अता कीजिये. 8 88
24 Jul 2010 कुछ न हमको भी एतबार आया. 6 84
23 Jul 2010 शहरे तमन्ना सूना सूना आँखें भी पथरायी सी. 6 65
22 Jul 2010 सब इजहारे इश्क का ठहरा एक न एक बहाना बाबा. 8 64
21 Jul 2010 फिर से आई लहर समुंदर से. 8 65
20 Jul 2010 जिससे मिलना उसे मन से मिलना. 2 54
20 Jul 2010 छोटी सी मायानगरी में क्या खोना क्या पाना बाबा. 4 57
19 Jul 2010 शहर में तुम्हारे तो चरचे बहुत हैं. 6 54
18 Jul 2010 किसके आगे दर्पण रक्खें सभी बेबसर बैठे हैं. 12 63
17 Jul 2010 रात बिना दिन, दिन बिन रात नहीं होती 10 56
17 Jul 2010 पूछ, हम आज मिले किनसे थे. 12 64
17 Jul 2010 दिल ने मुश्किल से कहीं दफ़्न करे होते हैं. 8 58
16 Jul 2010 जब हार ट्रालरों से सभी कश्तियाँ गयीं. 10 47
16 Jul 2010 दिल में जज़्बात थे ऐसे कि बहुत रंज हुआ. 12 43
15 Jul 2010 तुमसे बेकार है कहना सुनना 8 49
14 Jul 2010 खोल के आखिर कौन अचानक यादों की अलमारी को. 6 60
13 Jul 2010 कमाले कूजागरी यही है कि खाक से हो जमाल पैदा. 8 47
13 Jul 2010 ज़िन्दगी को जब नए रस्ते पकड़ने आ गए 10 48
13 Jul 2010 दायरा रौशनी का तंग रहा. 6 42
13 Jul 2010 रात हो, नींद न हो, और अकेलापन हो. 10 56
12 Jul 2010 अपने हुनर के कम ही ज़रा कद्रदां मिले. 12 53
11 Jul 2010 खिजां के हाथ चमन कुछ न यूँही बरहम है. 6 54
11 Jul 2010 बात गर उछली, सभी की शर्मसारी तय रही. 9 59
10 Jul 2010 महफ़िल उठी जनाब, चलो अब तो घर चलें. 8 65
10 Jul 2010 पहचान के निशान सभी वक़्त ले गया. 10 54
09 Jul 2010 ये कहानी कभी फिर सही. 12 73
08 Jul 2010 बेवफाई के शिकवे करेंगे सभी 14 46
08 Jul 2010 वार पर वार पे हैं वार शहर में तेरे. 10 55
07 Jul 2010 ये हवा-ए-गर्म थोड़ी देर चलने दीजिये. 18 91
06 Jul 2010 अश्कों से दिल के दाग ज़रा पोंछने लगे. 14 72
05 Jul 2010 आँखें पिघलीं मन भर आया. 10 59
04 Jul 2010 मयकश के लिए अमृत है मय, जाहिद के लिए वो ज़हर सही. 4 47
04 Jul 2010 सितम अपने जब तक सितमगर न छोड़ें. 4 52
03 Jul 2010 मैं हूँ फूल जिसके कि रंगों बू का शहर को कोई पता नहीं. 8 61
02 Jul 2010 कोई रौशनी की तलाश में, कोई रोशनी से परे गया. 9 48
02 Jul 2010 फिर ये कैसा झोंका आया यादों के गलियारे में. 6 38
02 Jul 2010 बादलों से आज निकला चाँद है.-2 6 42
02 Jul 2010 फिर सफ़र आज उस मुक़ाम पे है. 6 49
01 Jul 2010 अपने चहरे से नक़ाबों को हटाया न गया. 12 92
01 Jul 2010 गम ये नहीं मुझे कि मेरा आशियाँ जला. 8 55
01 Jul 2010 तुम कहीं भी रहो, रहो तो सही. 10 50
01 Jul 2010 हाथ मेरे थे, न खंजर मेरे. 10 62
30 Jun 2010 शायद फलक भी छू सकें,कोशिश तो कीजिये. 8 68
30 Jun 2010 सबने अफसाने सुनाये हमने सच्चाई रखी. 4 59
30 Jun 2010 भर्तृहरि के वैराग्य शतक के एक श्लोक से प्रेरित कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं- 8 66
29 Jun 2010 चलते चलते कहाँ निकल आये. 12 63
29 Jun 2010 हाथों में उनके दर्जनों नाम और पते रहे. 10 50
29 Jun 2010 तुम्हारे साथ जो गुजरी सो ज़िन्दगी गुजरी. 8 62
29 Jun 2010 कहाँ पे जाएँ कहाँ काली रात की जाये. 8 48
18 Jun 2010 जाने तू क्यूँ खफा हुई हमसे. 6 55
18 Jun 2010 तुम हो तनहा उधर इधर हम भी, 2 57
18 Jun 2010 आ तेरा साथ भी ज़रूरी है. 4 78
18 Jun 2010 ये तो एक दौलते परायी है. 2 53
18 Jun 2010 तूने हंस कर जिसे बिखेरा है, मैं उसी चांदनी में डूबा हूँ. 4 74
17 Jun 2010 फिर भींगा अन्दर तक अंतर. 0 54
17 Jun 2010 TREES 6 56
17 Jun 2010 दीदाए यार ने तराशा है,खूबरू कैसे हम नहीं होते. 6 56
17 Jun 2010 पेड़ दस्ते दुआ ज़मीं के हैं. 12 58
11 Jun 2010 ये उधेड़ बुन जो जिगर में है, तू मिले तो उसको सुकूं मिले. 4 58
11 Jun 2010 मेरा कारवाने हयात तो था जहाँ,वहीँ पे ठहर गया 6 59
11 Jun 2010 सारे शिकवे गिले रखो कल पर. 10 65
05 Jun 2010 एक नयी सुबह जिसे बाम पे लाने के लिए. 8 68
05 Jun 2010 दौड़ ये पर्यावरण की दौड़ने आये जिसे हम. 10 79
04 Jun 2010 रोशन सड़क से आगे है तीरगी बला की. 10 84
04 Jun 2010 कौन अजब जादू है नैन में तुम्हारे 4 80
03 Jun 2010 महारथी हैं, वृहन्नला से नृत्य निरत समुदाय. 8 81
03 Jun 2010 उसके शरमाते ही अम्बर में धनक सजते हैं. 4 65
02 Jun 2010 हासिल सफ़र का क्या है पता ही नहीं मिला. 12 72
02 Jun 2010 अपने अश्कों में ही जले देखो. 8 62
01 Jun 2010 करें आचरण पाशविक कहलायें इंसान. 8 66
31 May 2010 उसको चाहोगे तुम अगर दिल से. 10 75
30 May 2010 हम जुस्तजू में चारसू ज़ेरे फलक गए. 4 64
30 May 2010 सखि री सांझ बहुत मन साले.-2 10 73
29 May 2010 नाचेंगे क्यों न मोर अगर यूँ नचाइये. 8 59
29 May 2010 खामोशियों की उम्र न इतनी बढाइये. 9 78
27 May 2010 भला कब तक तुम्हारी राह तकते. 8 71
27 May 2010 संवारती मुझे है आप की सहज सराहना. 4 61
26 May 2010 तेरी हर बात याद आने लगी है. 8 78
26 May 2010 हरेक चेहरे पे तुम ही तो अयाँ थे. 6 62
24 May 2010 तुम्हें भी चुप न रहना चाहिए था. 2 61
24 May 2010 हरेक लब पे तुम्हारा ही तजकिरा आया. 4 57
23 May 2010 पिता का दुःख दुल्हनिया जानती है. 2 64
23 May 2010 दिए ज़ख्म दिल पर शबो रोज़ तुमने 4 58
23 May 2010 इस कुएं से आ रही आवाज़ को सुनिए ज़रा. 4 54
22 May 2010 ज़हन में जैसी है कागज़ पे भी उतर जानाँ. 6 68
22 May 2010 बला ए जां हुनर अपना हुआ है. 0 67
22 May 2010 उजाला बांटने आये थे क्या किया तुमने. 0 45
21 May 2010 गम से मिलनी निजात मुश्किल है. 4 79
21 May 2010 हुई कितनी सुहानी शाम यारों. 4 62
21 May 2010 रक़ीब खुश तमाम हैं, फरेब उनके फल गए. 8 65
20 May 2010 सोच की भागीरथी नीचे तो लाकर देखिये. 4 59
20 May 2010 हम ही उल्फत के गुनहगार यहाँ. 2 60
20 May 2010 समझिये आप ने खुदा पाया. 9 75
19 May 2010 टोकरों के रंग से अब कितना धोखा खाइए. ! 4 75
19 May 2010 तुम्हे इसके सिवा आता है क्या. 4 59
18 May 2010 यही अदम्य कामना क्षुधा न हो., तृषा न हो.- 6 64
18 May 2010 वो लफ्ज़ लब पे ठिठक कर खड़े लरजते हैं. 10 76
18 May 2010 है उनके कान में फाहा अतर का 8 79
17 May 2010 यूँ न लीजे आप अब अंगड़ाइयाँ 10 59
17 May 2010 गुनाहों में लज्ज़त हमेशा रही है. 6 55
17 May 2010 उसे यूँ तो भुलाना चाहता हूँ. 12 68
17 May 2010 तुम्हीं तमाम भीड़ में हो एक सिर्फ ढंग के.! 6 56
16 May 2010 सभी चाहें दिखाना सबसे ऊंचा अपना क़द प्यारे ! 4 76
16 May 2010 तुझे दुनिया से लड़ने का सलीक़ा सीखना होगा ! 6 66
16 May 2010 वो क़हक़हा जो लबों पर ठिठक के रोया था ! 12 69
15 May 2010 वार तो होते रहेंगे, प्यार के अवसर निकालो. 6 70
15 May 2010 धुंधली पड़ी तस्वीर है आँखें न मलो तुम. 4 67
14 May 2010 खोया जो वजूद उसका निशां ढूंढ रहा है 8 69
14 May 2010 जो कलई थी चढ़ी सब धुल चुकी है. 6 71
14 May 2010 देखता भी रहे और आँख चुराता भी रहे. 10 78
13 May 2010 सूरज को देखने की तुम्ही जिद पे थे अड़े ! 12 78
13 May 2010 मरीजों से छलावा हो रहा है ! 4 55
12 May 2010 माहौल में कोई तो ज़हर घोल रहा है ! 13 85
12 May 2010 बदलने हैं न यूँ हालात प्यारे ! 4 77
12 May 2010 तसव्वुर आप का दिल से परे पल भर नहीं जाता ! 4 56
11 May 2010 हो सके , खंजर मुलायम लो मियाँ ! 6 76
11 May 2010 गुनाहों की खड़ी मीलों फसल है ! 2 56
09 May 2010 माँ ने मेरे मकान को मधुबन किये रखा ! 4 88
09 May 2010 कुरेदा सुख की सतहों को तो नीचे ग़म निकल आये ! 9 86
09 May 2010 रहो ढूढ़ते बस बिपाशा नहीं ! 4 88
08 May 2010 नए विहान की प्रतीक्षा का धर्म 4 61
08 May 2010 मिथ्या है महनीय हुई,सत्य गए हो भूरे हैं ! 0 65
08 May 2010 तेरे चरणों को छूकर मैं जन्म जन्म तक धन्य हुआ !(On Mother’s Day) 8 70
07 May 2010 क़र्ज़ साँसों का कहाँ तक भुगतें,हम इसे और उठाने से रहे ! 8 92
06 May 2010 देखते हैं पार्थ सब लाचार से ! 6 80
06 May 2010 गली गली गौतम मिलते हैं ! 0 66
05 May 2010 एक इक शय ने पलट कर है पुकारा हमको ! 8 79
05 May 2010 ज़ख्म हैं रूह का मरहम जानां ! 10 84
05 May 2010 मन में जानेमन तुम्हारी याद है ! 4 79
04 May 2010 जानवर बदनाम हैं ज्यादा भले ! 6 75
04 May 2010 पीर के तपते हुए बैशाख में ! 10 88
04 May 2010 ये तस्वीर तेरी बहुत दिलनशीं है ! 12 72
03 May 2010 किसकी मजाल उनसे जो आँखें मिला सके ! 8 62
03 May 2010 छूट गया उम्मीद का दामन, अब बिलकुल तनहा हूँ मैं ! 4 62
02 May 2010 बुझते हुए चेहरों पर रूहों के बियाबां हैं ! 0 68
02 May 2010 शजर बहार से मांगे तो और क्या मांगे ! 4 77
01 May 2010 तेरी खुशियाँ ही सदा मांगी थी. 6 69
01 May 2010 Passion For Poetry — पद्य पिपासा. 2 96
01 May 2010 देख दिन रात संवरने वाले ! 2 68
24 Apr 2010 हर मुखौटे तले एक सी सूरतें ! 4 76
24 Apr 2010 अब तो आदाब कुछ मयक़दे के बदल ! 2 84
23 Apr 2010 सहमी सहमी सी सबा गुजरी है ! 4 79
23 Apr 2010 गुम्बद ज्यों के त्यों खड़े लगे नींव को चोट . 4 90
23 Apr 2010 हर नशा एक दिन उतरता है ! 12 137
22 Apr 2010 हर नफस है उसी का असर देखना ! 6 75
22 Apr 2010 गुल क्यों हैं सब उदास कहाँ दिलकशी गयी ! 4 65
22 Apr 2010 दिल पे जो बीत रहा है जानां ! 2 65
21 Apr 2010 जफा है या कि वफ़ा मैं ये जानता भी नहीं. 8 86
21 Apr 2010 कोई रिश्ता रहे कायम जानां 4 67
20 Apr 2010 रात डंसती रही रात भर 3 95
20 Apr 2010 रोज़ मुखौटे नए नए मिलते मुंह पर डाले लोग 4 77
18 Apr 2010 हंसी की कलम लग गयी है आंसू के पेड़ में, 6 89
18 Apr 2010 क़ह्क़हों के कब्रिस्तान में 0 61
17 Apr 2010 ज़ाहिरा सब क़सीदे ही पढ़ते रहे ! 4 64
17 Apr 2010 अजब खौफ दिल में समाने लगे हैं ! 0 65
16 Apr 2010 हमको बिलकुल ध्यान नहीं था ! 8 80
16 Apr 2010 रोटी रोज़ जुटाना मुश्किल होता है ! 6 88
15 Apr 2010 तेरी अंजुमन में क्या क्या न सितम पड़े हैं सहने ! 4 74
15 Apr 2010 ह्रदय की मात्र कामना न रात ये समाप्त हो 2 77
14 Apr 2010 तो सूरत तुम्हारी अजानी सी क्यों है 4 82
14 Apr 2010 दस्तकें सब बे-असर होने लगीं ! 2 81
14 Apr 2010 कोशिश न कोई कम की 4 83
13 Apr 2010 न करो उमीदे साया,वो कोई शजर नहीं है ! 2 94
12 Apr 2010 अच्छी भली कहानी का वो,त्रासद उपसंहार करेंगे ! 8 75
12 Apr 2010 जिसपे रो लें ,कोई शाना ही नहीं 4 73
11 Apr 2010 तुमको दरो दीवार ने पहचान लिया है 4 87
11 Apr 2010 जां निसारी के दावे अलग,और मरना अलग बात है 2 74
10 Apr 2010 आज लौटे हैं वही दर्द पुराना लेकर ! 6 88
10 Apr 2010 कलदारों से खेल रहे हैं, हैं खुद खोटे पैसे लोग ! 6 97
10 Apr 2010 हाशिये, हाशिये, सिर्फ हैं हाशिये ! 5 88
09 Apr 2010 कुछ तो सय्याद में बात थी,पास सब अंदलीब आ गए ! 12 84
08 Apr 2010 अधरों की बंकिम मुस्कानें मन में मदिरा घोल रहीं हैं ! 6 98
08 Apr 2010 तू मेरे अक्स में समाया है ! 6 105
06 Apr 2010 ये कौन अजनबी है,कई लोग कह गए ! 12 127
05 Apr 2010 कैसी कैसी सीतायें सब रावण हरता जाता है ! 10 92
04 Apr 2010 तू न हो तो तबस्सुम की फिर ,मेरे होंठो से पटती नहीं ! 4 105
04 Apr 2010 ज़िन्दगी की थकन को सहारे मिले! 4 88
03 Apr 2010 धड़कन धड़कन वक़्त के हाथों जैसे चलीं गुलेलें हैं ! 6 106
03 Apr 2010 ख्वाबों को अभी आँख में पलना नहीं आया ! 8 91
02 Apr 2010 अब तो टानिक हमें पिला कोई. 9 87
02 Apr 2010 वो ग़लत समझ रहे हैं कि दुआ में दम नहीं है ! 15 153
02 Apr 2010 वही क़ातिल हमें ठहरा रहा है ! 10 114
01 Apr 2010 फलसफे बे असर हो गए 6 93
01 Apr 2010 अक्सर प्यासी ही मिलती हैं आँखें पानी पानी सी. 12 94
31 Mar 2010 ये मेरी वेदना का राशिफल है ! 8 110
31 Mar 2010 जब कहानी में मोड़ आया है. 12 67
31 Mar 2010 सूरज भी चेहरा जो देखे सिर्फ दिखेगी छाया. 14 97
30 Mar 2010 आजीवन फिर तपना होगा 12 122
30 Mar 2010 शहर दर शहर भटकने की सजा पाई है ! 10 79
29 Mar 2010 सहमीं घुटनों में सर छुपा कलमें. 2 90
29 Mar 2010 किसने संध्या की आँखों में रंग भरे श्यामल रतनारे ! 2 82
29 Mar 2010 आकाश की किताब खुली पड़ी है, 6 115
28 Mar 2010 इन निगाहों में तुम आ गए 6 73
27 Mar 2010 मगर निगाह है नम क्या करूँ इस आदत का ! 4 91
27 Mar 2010 नश्शा ही निराला है तुम प्यार तो कर देखो ! 4 87
20 Mar 2010 बिछ गए लोग गोटियाँ बन कर ! 2 90
13 Mar 2010 चलो कहीं दिल और लगाओ,उनको कब फुर्सत मिलती है ! 0 97
13 Mar 2010 चमन में आके तुम्हारी मिसाल देते हैं ! 2 104
12 Mar 2010 जब निकले वो शहर सजाने ! 0 83
12 Mar 2010 बादलों में ढंकी चांदनी ! 2 103
12 Mar 2010 हैं बहिरंतर क्षत विक्षत हम ! 6 100
12 Mar 2010 अंगरागों से चेहरे मले जा रहे ! 6 119
11 Mar 2010 अर्थ के अनर्थ देखिये ! 4 111
11 Mar 2010 नक्श नज़र आते जब तेरे चंदा की रानाई में ! 2 105
10 Mar 2010 यहाँ इंसान कठपुतली बने हैं ! 6 82
10 Mar 2010 गैर को प्यार कहाँ करते हैं ! 4 86
10 Mar 2010 मुल्क को चद्दर बना बैठे हैं लोग. 2 103
09 Mar 2010 खेल जीत का आगे ही है, जंग अभी है ज़ारी जी. 6 110
09 Mar 2010 न चाहत में देखी ख़ुशी आप ने 6 96
09 Mar 2010 अच्छी मजलिस में आये हम,स्वर गूंगे, श्रोता बहरे हैं. 7 105
08 Mar 2010 झुकता है आकाश, बढ़ा कर हाथ रौशनी बीनेंगे.! 6 115
08 Mar 2010 हालाते मुल्क पर ये भला तब्सिरा रहा ! 4 83
08 Mar 2010 कुछ दिल गुजिश्त अपनी बतानी शुरू करें ! 2 75
08 Mar 2010 मगर हम जुर्म की औरों पे तोहमत मढ़ नहीं पाए. 6 80
07 Mar 2010 गुलशन गुलशन घूम रहे जो सब तेरे दीवाने हैं. 6 69
07 Mar 2010 फ़क़त उम्र भर पापड बेले.! 4 113
07 Mar 2010 यूँ न चुटकी में कोई फ़न आये.! 6 82
06 Mar 2010 इंगितों से लरजायीं डोरियाँ किसी ने ! 4 81
06 Mar 2010 बजेंगे घने खूब थोथे चने ! 4 95
05 Mar 2010 सखी कैसा सिसकता है बरसती सांझ का पानी. ! 10 112
04 Mar 2010 आये ना घनश्याम सखी री ! 4 126
04 Mar 2010 सीता न सिर्फ सोन हिरन से छली गयी ! 6 96
04 Mar 2010 कुछ तो कीजे कि ये मौसम बदले.! 2 92
03 Mar 2010 आईना ले के हम सोचते रह गए.! 4 103
03 Mar 2010 हम न यूँ ही फ़क़त बदगुमां हो गए ! 4 106
03 Mar 2010 पर मिले सबसे टूट कर हम भी ! 4 123
02 Mar 2010 जोगीड़ा सारा रा रा ! 4 100
02 Mar 2010 होलियों में याद आते हैं, भौजियों को हाथ बबुआ के ! 2 88
01 Mar 2010 बता देंगे बातें चलो नैन कारे ! 6 105
28 Feb 2010 धर्मराज हैं द्यूतरत , रहे शकुनि सब जीत ! 2 142
27 Feb 2010 चला सजनी मूंदा अंखिया पिया अब न अइहें ! 0 130
27 Feb 2010 दर्पण अन्धराया एक रहा,वो भी गुगली से चार प्रभो. 2 113
27 Feb 2010 खुद से भी रहने लगे नाराज़ हम ! 4 103
27 Feb 2010 आईना देखते ही गए हम जो डर ! 2 87
26 Feb 2010 ज़ज्बातों के पौधे कोमल, मन की मिटटी को नम रखिये. 6 117
25 Feb 2010 झील में देखता आईना रात भर ! 2 88
25 Feb 2010 हक़ से लेकिन कोई गाफिल ना रहा ! 4 94
25 Feb 2010 क्या करेंगे तेरे प्यार की वो कदर ! 2 97
24 Feb 2010 दिल रख दिया क़दमों में ज़रो-माल न देखे ! 8 113
24 Feb 2010 कर रहे हैं बात सब तलवार से ! 16 103
24 Feb 2010 हम हुए भी तो क्यों फ़िज़ूल अलग ! 10 119
23 Feb 2010 गीत रचे उस गीतकार ने मैं गुनगुना रहा हूँ ! 4 96
23 Feb 2010 रुख्सारे गुल पे लाजिम है ताज़गी का आलम 6 82
22 Feb 2010 छल गए बहुरूपिये से क्षण.! 8 100
22 Feb 2010 उसके हाथों में हैं डोरियाँ,पुतलियाँ मग्न हैं नाच में ! 8 106
22 Feb 2010 हम थे चाहत के मुजरिम मगर,जुर्म ये भी न आया हमें ! 0 85
21 Feb 2010 छाया के गीत बहुत दीर्घ हुए जाते है 0 90
21 Feb 2010 भुज मृणालों में तुम्हारी बद्ध मैं खोया हुआ सा. 5 128
21 Feb 2010 जितने गुल खिलने थे अब तक, खिल लिए ! 6 107
20 Feb 2010 यहाँ तो फूल सब कुम्हला चुके हैं ! 9 105
19 Feb 2010 मिट्टी सबकी एक है सूरत भले अनेक. 14 149
19 Feb 2010 गुरुरे हुस्न तो कब कम हुआ है ! 4 86
19 Feb 2010 स्वर तुम्हारे नहीं पा सकी,गीतिका रह गयी मौन ही ! 6 93
18 Feb 2010 फिर भी क्यों हम पर नज़र होती नहीं! 8 100
18 Feb 2010 तुझको ऐ दिल अभी संभलना था ! 7 100
18 Feb 2010 रच दो जादू अँगुलियों से तन मेरा चन्दन हो जाए ! 7 100
17 Feb 2010 छोड़ कर इश्क का चलन प्यारे 10 79
17 Feb 2010 देख कर जेन नेक्स्ट को ऐसे रिदम की ताल में 4 94
16 Feb 2010 आप थे इस क़दर खूबसूरत कहाँ ! 4 99
16 Feb 2010 पिलाने का अजब ही ढब रखा है ! 6 105
15 Feb 2010 सतरें पड़ीं है फूल पे खुशबू के पांव से 2 108
15 Feb 2010 यही तो हासिल है ज़िन्दगी का लगा रहेगा ये जीना मरना ! 5 99
14 Feb 2010 रुदादे इश्क छोड़ कोई और बात कर ! 9 95
14 Feb 2010 सारे फ़िदा ए यार तो दुनिया में खो गए ! 4 77
13 Feb 2010 दुआ ये करो सब्र दिल को मिले,दिया रब ने यूँ भी मियां है बहुत 2 113
13 Feb 2010 डार्लिंग डार्लिंग रट रहे गलती मगर न दाल 4 120
13 Feb 2010 हमारे पांव थे शबनम के फूल फूल चले 2 107
12 Feb 2010 कहीं रहोगे मेरे दिल की जान लोगे तुम 8 103
12 Feb 2010 रस्मे उल्फत निभाई यूँ मैनें , चुप थे,क्या उसको बेवफा कहते ! 10 105
12 Feb 2010 हुस्न का है तेरे जवाब कहाँ ! 6 111
10 Feb 2010 कल पर रख दो सब मनुहारें,आज मेरा मन ठीक नहीं है ! 6 113
10 Feb 2010 रात के हामी हजारों हो गए,क्या करे सूरज बिचारा देखना ! 6 90
09 Feb 2010 अजब दोस्त एक आज हमको मिला है 10 128
09 Feb 2010 जो कि पुराने ज़ख्म कुरेदें,वो अफ़साने क्यों पढ़ते हो ! 2 127
08 Feb 2010 बदन के पोर अब भी रात भर अपने दहकते हैं ! 5 117
08 Feb 2010 बता तू ही अब इस पर किस तरह लिक्खूं ग़ज़ल प्यारे ! 22 160
07 Feb 2010 आस्तीनों में छुरी रख मुंह में रखना राम राम 4 110
06 Feb 2010 खिल उठीं आँखें तुम्हारी हैं कमल सी ! 0 115
06 Feb 2010 मेरी आँखों में विम्ब निहार,स्वयं पर सम्मोहित सी तुम ! 10 149
05 Feb 2010 गीत गुमनाम हैं गालियाँ पोपुलर,क्या कहें दोस्तों वक़्त के फेर हैं ! 0 140
05 Feb 2010 ग़म की शाम अँधेरी आई, यादों के जुगनू आये ! 4 116
05 Feb 2010 देह का दोहा हुआ संपूर्ण है, साँस करती साँस से संवाद है ! 2 140
04 Feb 2010 जो हाथ न आया हाथ मेरे , बस उसके लिए तड़पना था. 6 140
04 Feb 2010 कहीं भी जाएँ तुम्हारी गली में फिरते हैं.!२! 8 131
04 Feb 2010 जो बख्शता है तो दुनिया हमें खराब न दे ! 5 108
03 Feb 2010 हुए लफ्ज़ लफ्ज़ हैं आईने मेरे सब सुखन हैं संवर गए ! 10 128
03 Feb 2010 धर्म ध्वंस के अब पर्याय,ईश्वर अल्ला सब निरुपाय 13 179
02 Feb 2010 अभी न इतनी ज़ल्दी हार , चादर भर तो पांव पसार ! 8 139
02 Feb 2010 ऐ काश तू ही मिले हासिल सफ़र जानां ! 5 125
02 Feb 2010 रात भर देखने की हसरत की ! 12 115
01 Feb 2010 ये और बात है अहसान सब भुलाते हैं ! 8 107
01 Feb 2010 हम क्या हैं पूछा सबने, कीमत पर पहचानी कम ! 8 127
31 Jan 2010 तुम्हारी लम्हा ब लम्हा बस आरज़ू की है ! 4 112
30 Jan 2010 चंद लाइनें बस कहनी थीं, 4 174
30 Jan 2010 खेत बने कालोनियां सूखे सारे ताल ! 10 323
29 Jan 2010 हाले दिल जानता है सब साक़ी ! 4 114
29 Jan 2010 इल्तिजा का जवाब मांगें वो और निगाहों से लाजवाब करें ! 6 107
29 Jan 2010 हमें भी प्यार से देखा तो था कभी जानां 4 120
28 Jan 2010 मुझे खुशबुओं से नवाज़ दे 6 106
28 Jan 2010 शिद्दते दर्द कभी कम न हुई 8 110
28 Jan 2010 शीरीं लब मीठी बातों में तल्ख़ कहानी भूल गए हैं ! 4 130
27 Jan 2010 बातें तो बेकार की बावन हाथ जुबान 8 140
27 Jan 2010 माँ के पैरों में जो जन्नत देखी ! 6 114
27 Jan 2010 दोऊ हाथ बटोरिये जितना सकें बटोर ! 6 117
26 Jan 2010 तुम्हे पात पीले पसंद आ रहे हैं ! 4 91
26 Jan 2010 सुना है वो जालिम संवरने लगा है ! 8 125
25 Jan 2010 ज़ुल्फ़ बिखराए रुख पे आये वो 4 105
25 Jan 2010 सेवा का व्रत ले किया मेवे का व्यापार 6 94
25 Jan 2010 तुम्हे ही उज्र रहा साथ साथ चलने में ! 6 91
15 Jan 2010 गम से देनी निजात थी सबको 7 130
15 Jan 2010 वर्ना तो ये हमदर्दी बस एक नुमाईश है ! 2 112
15 Jan 2010 इस गुल में भी है खुशबू,सीने पे सजाओ भी ! 6 76
14 Jan 2010 ये उसकी नज़र, उसकी नज़र, उसकी नज़र है ! 8 161
13 Jan 2010 तुमसे तो निभ चुकी कि तुम्हे वक़्त ही नहीं 6 150
13 Jan 2010 ऐसा नशा न आया कभी पहले साक़िया 9 183
12 Jan 2010 उनको जब से संवरते देखा है ! 8 119
11 Jan 2010 डायनासोर बिला गए बचे फ़क़त काक्रोच ! 5 157
08 Jan 2010 फूल खिले गुलदान में सूनी वन में शाख! 4 138
07 Jan 2010 लडूं मैं जग से कभी कर सका न साहस मैं ! 4 150
07 Jan 2010 नींद अगर पहले खुल जाती ,क्यों सपने साकार न होते ! 6 156
06 Jan 2010 नादिम हुए हैं तुझको सुना कर के हाले दिल ! 4 147
04 Jan 2010 जो हमारा नहीं हो सका ,बस उसे याद करते रहे ! 6 142
04 Jan 2010 रिफाक़त की ये कीमत मांगते हैं 2 126
03 Jan 2010 रौशनी की तो वैसे लकीरें हुईं 0 118
03 Jan 2010 मुझे ही लोग दीवाना कहेंगे ! 2 126
02 Jan 2010 तुम्हारी याद, हरसिंगार जैसे 0 134
02 Jan 2010 हर कोयला सुनहरा है ! 0 119
01 Jan 2010 हमसफर तो थे, हम ख्याल न थे 2 177
01 Jan 2010 खुद से छिपना मगर असंभव है ! 2 152
31 Dec 2009 शीरीं ने भी बदल है लिया नुक्ता -ए -नज़र 2 175
31 Dec 2009 ये शहर है हसीन ख्वाबों का 2 139
30 Dec 2009 दिल को दिल से मिलेगी राह ज़रूर 2 158
30 Dec 2009 वो तो चेहरा तलक भी भूल गया ! 2 156
29 Dec 2009 उसको देखे तो एक उमर गुजरी 2 219
29 Dec 2009 सबकी नज़रों में मत उतर इतना ! 3 143
29 Dec 2009 अपनी नज़रों में कहाँ तक गिरते ! 2 111
25 Dec 2009 उसकी नज़रों ने है बख्शा किसको 12 192
24 Dec 2009 ये अजगर आदमी निगले हुए हैं !! 8 189
24 Dec 2009 ज़िन्दगी यूँ न हार सहरा में ! 6 185
24 Dec 2009 उसके रुखसार की घुली रंगत मेरी गुलनार हो गयीं शामें ! 4 166
23 Dec 2009 जब से उनकी नज़र छू गयी ज़िन्दगी मदमयी हो गयी ! 8 202
23 Dec 2009 दाम अगर देने का दम हो, हिलता है अब हर ध्रुव तारा ! 14 162
22 Dec 2009 आखिर वो शोख दिल का ही मेहमान हो गया ! 4 147
22 Dec 2009 उसके हँसते ही सारा चमन खिल उठा 3 136
21 Dec 2009 हो मुबारक हो मुबारक ये नया साल तुम्हें !! 6 365
21 Dec 2009 मेरी आँखों में मगर ख्वाब तेरे पलते हैं ! 4 160
20 Dec 2009 जिसे वफ़ा का मुजस्सिम बदल समझता था 0 130
20 Dec 2009 तेरे प्यार के ये निशान थे जो छुए गए तो चमक गए 6 142
19 Dec 2009 बेहुनर आज मकबूल हैं 2 150
19 Dec 2009 सारे खूबरू शौहर रहे उनके ! 0 126
19 Dec 2009 फिर भी बैठे हुए हैं दिल थामे 0 124
18 Dec 2009 ये नमी काट डालेगी दिल 2 133
18 Dec 2009 पास रख कर तेरे प्यार का उम्र भर हम सुलगते रहे 4 166
17 Dec 2009 गारंटी 10 161
17 Dec 2009 “चोरी का कुत्ता न घर का न घाट का’” 7 171
16 Dec 2009 उसका दामन ढलकने लगा 4 164
16 Dec 2009 तुम्हीं से प्यार होना लाजमी था? 6 162
15 Dec 2009 रौशनी थी पराये घर की वो 2 134
15 Dec 2009 ज़मीर बेच रहे थे सभी मैं लौट आया 5 151
14 Dec 2009 आशना इस तरह मिला कोई 8 187
30 Nov 2009 मुद्रा की आकर्षक मुद्रा पर महफ़िल बेहोश 4 177
30 Nov 2009 दफ्तर विचित्र देश है दफ्तर विचित्र व्यापार है. 2 177
28 Nov 2009 उसकी आँखों को ही चल राह का तारा कर लें 2 167
27 Nov 2009 है आंसुओं में गूँधी अहसास की ये मिटटी 2 171
26 Nov 2009 तू है ज़मीन तेरी हदें हैं बंधीं हुईं 2 187
26 Nov 2009 भर न मुट्ठी में जान कर जुगनू 2 191
25 Nov 2009 फलक के सितारों से बहलें भी कब तक 4 164
25 Nov 2009 सखि री साँझ बहुत मन साले 6 212
24 Nov 2009 मुखबिरी अश्कों ने दर्दे दिल की की 4 216
24 Nov 2009 श्री कृष्ण वंदना 3 220
24 Nov 2009 उदास यादों के झुरमुटों में वो झिलमिलाती शमा सा चेहरा 2 168
23 Nov 2009 मेहमान थे जो दिल के, सभी घर बदल गए 6 181
23 Nov 2009 सखि पोंछ नयन वे आते हैं 4 171
22 Nov 2009 उजड़ गए नींदों के मधुबन मुरझाये ख्वाबों के फूल 10 197
14 Nov 2009 खुशबुएँ छोड़ आयी कहाँ दोस्तों 0 184
14 Nov 2009 mchhali ko aaj fir badi machhali nigal gayee/मछली को आज फिर बड़ी मछली निगल गयी 4 193
14 Nov 2009 Raat bhar meghna madhu chhalakti rahi/ रात भर मेघना मधु छलकती रही 2 198
14 Nov 2009 aap chup ho gaye bolte bolte/ आप चुप हो गए बोलते बोलते . 0 143
14 Nov 2009 धुआं तमाम , रौशनी है कम 0 165
14 Nov 2009 पंछी में अभी कुव्वते परवाज है बहुत 0 144
14 Nov 2009 वो लौट के न आएगा अब रास्ता न देख 4 181
13 Nov 2009 बर्बरीक हतबुद्धि श्रृंग से हर अवलोके धर्म क्षेत्र के धर्म युद्ध के धंधे धोखे 0 155
13 Nov 2009 उसकी आँखों ने कुछ कहा तो है 2 157
13 Nov 2009 फ़रिश्ता आएगा कोई न आसमानों से 2 155
13 Nov 2009 इधर भी तिश्ना लबों का हुजूम बेकल है 0 143
12 Nov 2009 mat chheeno mujhse mere swar/मत छीनो मुझसे मेरे स्वर 0 165
10 Nov 2009 निकल तो जाऊँ ज़रा जात के हिसारों से 3 210
10 Nov 2009 झर पड़ेंगे अंधे जुगनू लाख दामन में अभी 2 167
08 Nov 2009 puja krenege aap ko patthar bana ke log 2 215
08 Nov 2009 ana ko itni bulundi pe le gaye saare 0 192
08 Nov 2009 rahin suraten to nazar me bahut 5 221
06 Nov 2009 shiv rupi yeh ped kahava 6 222
06 Nov 2009 dhai aakhar nahin padh saka 3 184
06 Nov 2009 गिरी पंखुडी जो किताब से तेरी याद फिर से जगा गयी 6 171
05 Nov 2009 अभिमन्युओं के खून से सब हाथ सन गए 2 180
05 Nov 2009 चंद लम्हात में हो जायेगी रुदाद तमाम 4 163
04 Nov 2009 unhin ka daamne shaffaq daag daag mila 0 165
03 Nov 2009 मैं भी शायद संवर गया होता 0 97
02 Nov 2009 मैं हूँ मुन्तजिर तेरे लम्स का कभी प्यार से तो पुकार ले 4 189
31 Oct 2009 sabke seene hi bane sar dekhe 1 189
30 Oct 2009 junoon samajh ke jise 6 202
29 Oct 2009 aap jayen na dil tod kar 0 147
29 Oct 2009 ye bisaat hai bade khel ki 2 253
27 Oct 2009 chidian kahan rahen ab jaake 0 150
26 Oct 2009 ajnabiyat hui tarze-nau 0 195
24 Oct 2009 धुंध छाई है तेरी यादों की कुछ भी दिखता नहीं सिवा तेरे 4 234
24 Oct 2009 gair ke ashq se num na hon jiski aankhe vo insaan kya 2 181
23 Oct 2009 कहाँ खो गए काफिले रौशनी के 3 265
21 Oct 2009 सवारूँ किस तरह दुनिया , जिधर देखो कमी निकले 0 130
21 Oct 2009 इनसे रौनक बहारों की है वरना फूलों की मुस्कान क्या 3 262
20 Oct 2009 उसने देखा नज़र भर मुझे 5 229
14 Oct 2009 dhar talwar ki parakhne me ja b ja dekh kitne sar bikhare 0 187
14 Oct 2009 यूँ परिंदों के सारे घर बिखरे 4 286
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