vivek

rajendra sharma 'vivek'
Gender: Male
City: jaora
Country: india
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जो सृजन यहाँ सतत चलता ,
वह सहज उन्मुक्त बनता ....
सततता कैसे बनाए,
वक्त ने यहाँ जुल्म ढाए...
जल धारा की प्रबलता में ,
भंवर गहराते ही जाए....
यथार्थिक भंवरो की सघनता,
उन्मुक्त भावो को दबाये....

Poems by vivek


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