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आज कुछ खास लिखूँ,

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सोचता हूं आज कुछ खास लिखूँ,

लिखूँ सब बाते कही अनकही, जिनमें तुम हो,

वो अनसुलझे सवालों के जंगल लिखूं जिनमे हम गुम हो,

लिखूँ जीवन की उन टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों को जो हमे पास ले आए,

उन उम्मीदों के पुलिंदो को लिखूँ जो जीने की आस ले आए,

कह के बताना शायद मुश्किल हो मिजाज़ सारे रंगों का,

तुम देख सको इस अंदाज मे रंगों के ज़ज्बात लिखूँ.

कोई बीता लम्हा यादों से उतर ना जाए यूँही बेवजह,’

यादें समेटे एक एक लम्हों का खरा हिसाब लिखूँ.

सोचता हूं आज कुछ खास लिखूँ.

©अभिनव

One Comment

  1. KUSUM MADHUKAR GOKARN says:

    Abhinav
    Aapki Kavita achhi hai.
    Magar ‘khaas baat’abhi baaki hai.
    Dhanyavad
    Kusum

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