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मनमीत

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जीवन पथ पर मिलना अपना,
मिलकर साथ निभाना अपना,
अमर उपवन में पुष्प-भ्रमर सा,
बंधन होता जाना अपना,
कैसे बतलाऊँ यह क्या है?

मेरे मन के मीत तुम्ही हो,
जीवन का हर गीत तुम्ही हो,
जीवन की सुन्दर झांकी में,
जगमग जलती ज्योति तुम्ही हो,
कैसे बतलाऊँ तुम क्या हो?

मेरे वैवाहिक जीवन की,
हर पल एक नयी उमंग हो,
रजनीगंधा सी सुगंध हो,
सुख दुःख में मेरा सम्बल हो !!

 

रुचि मिश्रा

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