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भोला बचपन

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यह देखो यह नन्हीं चिड़िया,
अम्मा ! तुमने देखी चिड़िया,
दूर-दूर से दाना लाती,
बच्चों का वह पेट भराती,
चीं-चीं करते दाना चुगते ,
पेट भरे तब चुप सो जाते,
अम्मा कितनी प्यारी चिड़िया,
यह देखो यह नन्हीं चिड़िया |

अपने दोनों पर फैलाती,
दूर – दूर तक उड़ती जाती,
थकती कभी नहीं क्या चिड़िया?
कितनी ताकतवर है चिड़िया !
चाहे कोई मौसम आये,
अपने पंखो को फैलाये,
दूर देश हो आती चिड़िया,
अम्मा देखो प्यारी चिड़िया |

नन्हें बच्चे चीं -चीं करते,
चीं चीं करके शोर मचाते,
दिन भर ऊधम करते रहते,
आपस में भी लड़ते रहते,
कैसे समझाती फिर चिड़िया ?
कितनी समझदार है चिड़िया !
अम्मा देखो प्यारी चिड़िया |

पर अम्मा, मुझको दुख होता,
बच्चे झाड़-फूस पर सोते,
चिड़िया भी टहनी पर रहती,
हर मौसम कितना कुछ सहती,
अम्मा इनको घर ले आयें,
आँगन में कोटर बनवाएं,
जाड़ा लगे ना धूप लगेगी,
बारिश में भी मौज रहेगी,
हर मौसम खेलेंगे जम कर,
चीं चीं चीं चीं चूं चूं सुन कर |

(रूचि मिश्रा)

2 Comments

  1. Kusum says:

    Beautiful poem. I could feel the twitter of the birds while reading it. The language reflects a child”s innocent houghts . Humanitatian message at the end gives the poem an elevating touch.
    Kusum

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