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|| ख़्वाब इतने भी नहीं हल्के, के टूट जाएँ तो दिल छलके ||

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Hindi Poetry

|| ख़्वाब इतने भी नहीं हल्के
के टूट जाएँ तो दिल छलके ||

|| देखो इनको कुछ ऐसी नज़र से
जिनमें उम्मीदों के पल झलकें ||

दिल के क़ाग़ज़ पर,
लिक्खी थी कोई मुराद
पूरी जो न हुई,
ज़िन्दगी भर लहकेगी याद

महफ़ूज़ इसको रखो, आँसू से गीली न हो
मिट ही जाएगी वरना गल के

जिसको न कोई गिला,
हसरतें उस से जा मिलीं
हँसने की जिसमें ललक,
उस क्यारी में कलियाँ खिलीं

ख़ुद से अक़्सर मिलते रहो , तन्हाई का शिकवा न हो
जियो इस राह पर तुम चल के

|| ख़्वाब इतने भी नहीं हल्के
के टूट जाएँ तो दिल छलके ||

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