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पुराना सिक्का : मैं

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Hindi Poetry

चुक चुका हूँ मैं,
रुक चुका हूँ मैं
चलता रहा सालों साल,
नाज़ करती मेरी टकसाल
ज़ेब से अजब रिश्ता रहा
मिटा न मैं भले घिसता रहा
ढल चुका हूँ मैं
चल चुका हूँ मैं
लुक चुका हूँ मैं
छुप चुका हूँ मैं
झुक चुका हूँ मैं
धुकधुका हूँ मैं
चुक चुका हूँ मैं
रुक चुका हूँ मैं

~रीतेश सब्र | Reetessh Sabrr

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