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उठे उठे से जज़्बात…

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Hindi Poetry


उठे उठे से जज़्बात में किस को क्या बताऊँ
कोई मुझको समझ ले तो फिर उस से कुछ न छुपाऊँ

आते जाते जिसको देखा, वो पहले मिल चुका था
वो नहीं आया जिसको सोचा था गले लगाऊँ
कोई मुझको समझ ले तो फिर उस से कुछ न छुपाऊँ

पानी आँखों मे बहुत था पर ये बात थी हल्की
ज़ाया करूँ दिल की नमी सूखी क्यों डगर बनाऊँ
कोई मुझको समझ ले तो फिर उस से कुछ न छुपाऊँ

समझना मुझे आसां है दिल में सफ़ाई रख कर
दर खुला न सही, मैं नज़रों से दिल में समाऊँ
कोई मुझको समझ ले तो फिर उस से कुछ न छुपाऊँ

मत गिराना आँखों से ख़फ़ा हो कर मेरा आँसू
मैं खोटा सही, बेउम्मीद ही कभी काम आऊँ
कोई मुझको समझ ले तो फिर उस से कुछ न छुपाऊँ

हैं जज़्बात मेरे बेहिसाब, कभी सब्र से सुनना इन्हें
तुम हो जाओ मेरे, दास्तां ए दिल लबों पे सजाऊँ
कोई मुझको समझ ले तो फिर उस से कुछ न छुपाऊँ

उठे उठे से जज़्बात में…

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