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तुम धड़कन और सांस रही

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Hindi Poetry, Uncategorized

तू प्रीती का गीत रही भीतर की मुस्कान

तुझसे जीवन पाऊ मै भरता रहूँ उड़ान 

 

इस जग में जहाँ प्यार रहा सुख है अपरम्पार

गहनों में हो पायल तुम जीवन की रफ़्तार

तुम धड़कन और सांस रही अमृत का रसपान 

 

तुझपे वारा ये तन मन जो भी कुछ है शेष

तू मौसम मधुमास भरी तू विचार विशेष

मरते दम तक साथ रहे निकले संग ही प्राण

 

सारा जीवन प्यार मिले प्राणों का आधार

सजनी तेरे साजन पर रख लेना ऐतबार

एक नेक हूँ साथ सदा यही सत्य ही जान

One Comment

  1. Narayan Singh Chouhan says:

    bhut hi Shandar

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