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बहुत दूर हो जाऊँगा एक दिन

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Hindi Poetry

बहुत दूर हो जाऊँगा एक दिन
देखना मशहूर हो जाउँगा एक दिन

जख्म समझ कर भुला मत देना
नासूर हो जाऊँगा एक दिन

इश्क में कोइ इल्जाम सर नहीं रहता
बेकसूर हो जाऊँगा एक दिन

तू मुझसे लाख खफा सही
तुझको मंजूर हो जाऊँगा एक दिन

जितना सजना-सँवरना है सँवर ले
आइना हूँ, चकनाचूर हो जाऊँगा एक दिन

दिनेश गुप्ता ‘दिन’

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