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आप इस मुल्क में किस उजाले की बात करते हैं

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Hindi Poetry

 

आप इस मुल्क में किस उजाले की बात करते हैं
यहाँ तो अंधेरे रौशनी से मिल कर के रात करते हैं

कोई मजहब नहीं है देश के गद्दारों का
आप व्यर्थ में ही जाँत-पाँत करते हैं

इस शहर का मौसम भी कुछ अजीब है
बादल भी यहाँ घर देख के बरसात करते हैं

बेेजवह ही चिंतित है आप मुल्क के हालात पे

यहाँ तो हर रोज सङकों पर जज्बात मरते हैं

जो मिल लिये जमाने भर से तो आइये
जरा खुद से मुलाकात करते हैं

दिनेश गुप्ता ‘दिन’

 

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