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भावो का उपहार

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Hindi Poetry

घर हो मंदिर प्यार रहे प्यारा सा परिवार

प्यार सदा अनमोल रहा भावो का उपहार

एक प्यारा सा भाव रहा प्यार सा एक बोध

मन के आँगन प्यार रहा प्यार भरा अनुरोध

मन व्याकुल है तृप्त नहीं मुझको तू पहचान

मन के मांगे नहीं मिली प्रियतम की मुस्कान

तन मन पागल प्यार रहा नहीं मिला है चैन

आँखे नभ् को ताक रही बीत गई कई रैन

मीठी कोमल प्यारी सी होती लब की शान

मोहे मुझको न्यारी सी दिलवर की मुस्कान

मधुरिम होता होठो पर शब्दों का श्रृंगार

अब न छेड़ो कड़वे बोल धधके मन अंगार

प्यारा सा संसार रहे मीठे हो हर बोल

तू अपने हर सपने को वचनो से ही तोल

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