« »

हक़ीक़त का सफर देखा है ख़्वाब होने तक…..

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Uncategorized
हक़ीक़त का सफर देखा है ख़्वाब होने तक
आँखों का बहना मुसलसल शराब होने तक

इंतज़ार और फिर उसका इंतजार किया हमने
एक बार गुज़र कर लौट फिर अज़ाब होने तक

उन्हें न हो हमे तो है दीवानगी पे यकीन अपनी
उगाते रहेंगे ये काग़ज़ के फूल गुलाब होने तक

कहाँ कहाँ रुसवा होईए जाकर शकील आखिर
इसकी दरिया ए इश्क़ में बहिए सराब होने तक     सराब – रेगिस्तान

Leave a Reply