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मुझे क्या चाहिए !!!

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Hindi Poetry

धरा का नाम दे ,कर्तव्यपरायण बना
छीनते रहे,मुझसे मेरे होने का हक़ !!

बेच कर मेरे सपने थमा कर जिम्मेदारियां
खुश रहो का आशीष देते रहे!!

एकांत छीन कर मेरा ,मेरे शब्दों में
अपनी एहमियत खोजते रहे !!

सबकी उमीदें पड़ी हैसामने
कोई मुझसे भी तो ये पूछे
मुझे क्या चाहिए !!!!

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