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माँ

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Hindi Poetry

कभी मेरी भी माँ होती थी
हँसता तो वो हँसती थी
में रोता तो वो रोती थी
कभी मेरी भी माँ होती थी

होंसला देती आँचल में लेती
मेरे सपनों की माला पिरोती थी
कभी मेरी भी माँ होती थी

अँधेरा होता जब ज़िंदगी में
वो ही तो मेरी ज्योति थी
कभी मेरी भी माँ होती थी

छोटा था या में बड़ा हुआ
प्यार किए बिना नहीं सोती थी
कभी मेरी भी माँ होती थी

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    <3 Very sensitive lovely poem indeed….!
    “And in the deepest core of our heart,
    resides always lovingly alive, with our dad, our mom ….!
    Hearty commends for the poem ….! 🙂
    !

  2. Viju says:

    Thank you Sir

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