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जिस-जिस ने मुझको कर्ज दिया…. ‘गीत’

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‘गीत’
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जिस-जिस ने मुझको कर्ज दिया, उस-उस दाता को नमस्कार !
जिससे मेरा सम्मान हुआ,
पल-पल मेरा गुणगान हुआ,
जिस कृपामयी निधि को पाकर,
मै ऋणी नहीं ऋणवान हुआ !
हर घाम-वृष्टि जो साथ रही, उस प्रिय छाता को नमस्कार !
जिस-जिस ने मुझको कर्ज दिया, उस-उस दाता को नमस्कार !
हर आग्रह पर हर बार दिया,
सकुचाकर ही, पर प्यार दिया,
थी लघुतम मेरी माँग मगर,
सबने दिल खोल उधार दिया !
हिय को गदगद करने वाले, भ्राता- भ्राता को नमस्कार !
जिस-जिस ने मुझको कर्ज दिया, उस-उस दाता को नमस्कार !
वह कर्ज कभी भी चुका नहीं,
फिर भी मैं सम्मुख झुका नहीं,
आते-जाते राहों पर मैं,
सम्बोधन से भी रुका नहीं !
हर शीतल शान्त सरोवर के प्रिय जलजाता को नमस्कार !
जिस-जिस ने मुझको कर्ज दिया, उस-उस दाता को नमस्कार !
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हरीश चन्द्र लोहुमी, लखनऊ (उ.प्र.),भारत, सम्पर्क- 9451559605 🙂
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One Comment

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह
    जिन जिन का है क़र्ज़, उनके प्रति अर्थपूर्ण भावनिक गीत में अर्ज ..!
    अति सुन्दर मनभावन रचना ….!
    हार्दिक अभिवादन …! 🙂

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