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ए ख़ुशी

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Hindi Poetry

ए ख़ुशी
क्यों रूठी रहती है मुझसे
क्यों छुपी रहती है मुझसे
क्या नाराज़गी है मुझसे
क्या शिकायत है मुझसे

ए ख़ुशी
तमाम कोशिश ना फली
ढूंढा तुझे हर गली गली
क्यों आरज़ू थी फूलों की
जब ना खिली एक काली

ए ख़ुशी
ना चांदनी रास आयी
ना तू कभी पास आयी
क्या करूँ उस चाँद का
जब ना काम आयी दियासलाई

ए ख़ुशी
इस कदर ना मुह फेर
करेगी तू कितनी देर
मैं भी तो एक इंसान हूँ
कभी तो मिल, श्याम सवेर

ए ख़ुशी

2 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत सुन्दर !

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