« »

ज्ञान का अमृत तरल है

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Uncategorized

माँ शारदे का हंस होता
श्वेत सुन्दर और नवल है
सत्य की होती प्रतीति
ज्ञान का अमृत तरल है

ज्ञान का गहरा सरोवर
अंकुरित होते कमल है
श्वेत वसना सौम्य मूर्ति
माँ तेरी करुणा में बल है

पंक भी होता है उर्वर
शंख रहता सिंधु जल है
मान से जीवन मिलता
अपमान में होता गरल है

सत्संग से जीवन खिलता
सत्य तो होता अटल है
संत की करुणा की छाया
संवेदना होती सजल है

अज्ञान में होता अहम् है
ज्ञान सहज और सरल है
माँ तेरी कृपा से सृजन
काव्य की धारा प्रबल है

One Comment

  1. Mira says:

    Plainesg to find someone who can think like that

Leave a Reply


Fatal error: Exception thrown without a stack frame in Unknown on line 0