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काश

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Hindi Poetry, Uncategorized

काश वो चाँद
आज भी आसमा मे होता

वो मासूम सा उजाला रात का
काश आज भी रवा होता

काश आज भी मैं सिर्फ मैं तुम्हारे ख्याल मे होता

क्यों तुम आजमाने चली गयी संसार को

काश मैंने जब तुम्हे आगाह किया था
तुमने मान लिया होता

जिद थी तुम्हरी या समझ थी
जब तुमने कहा था मुझसे

कीै मैं काबिल नहीं तुम्हारे
काश इस बात मुझे पता होता

One Comment

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    भावों का दर्शनीय गाम्भीर्य ! वाह !

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