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रम रही हर प्रीत हैै

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Hindi Poetry, Uncategorized

सृष्टि के अद्भुत नज़ारे दृष्टिगत हर रीत है
सिंधु के सुन्दर तटो पर रम रही हर प्रीत हैै
तीर के हम है दीवाने तीर प्यारे है सुहाने
नियति के सौंदर्य में है भाव है संगीत है

तेज होती गर्मिया है खिलखिलाते फूल है
दे तरावट यह सरोवरऔर गहरे शूल है
रंग झलके लाल पीलेपंक है और धुल हैै
पंक में सजती संवरती जिंदगी मशगूल है

 

One Comment

  1. Vishvnand says:

    sundar aur manbhaavan
    Hearty commends ….!

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