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रूठ कर***

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Hindi Poetry

कभी मुहब्बत की रुसवाई मत करना
…इस दिल से कभी बेवफ़ाई मत करना
…….मना लूँगा तुमको चाहे जैसे भी करके
…………रूठ कर यूँ ज़िक्रे जुदाई मत करना

सुशील सरना

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