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***दस्तक ***….

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Hindi Poetry

मौत की दस्तक पे चश्म ज़र्द हुआ करती है
आखिरी सांस ज़िंदगी की सर्द हुआ करती है
भला कौन जीत पाया है अजल से आज तक
शेष बस जलती चिता की गर्द हुआ करती है

सुशील सरना

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