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हयाते सफ़र ***

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Hindi Poetry

हयाते सफ़र का आगाज़ समझ सकता है
अंजामे सफ़र का वो राज़ समझ सकता है
खुद को समझ ले ग़र ये ज़मीं का इन्सान
वो ज़िंदगी का हर अंदाज़ समझ सकता है

सुशील सरना

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