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सामर्थ्य

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Hindi Poetry

शक्ति जहा व्यक्ति का बाह्य बल है
सामर्थ्य वही व्यक्ति की आंतरिक क्षमता है
शक्ति का अर्थ जहाँ यह दर्शाता है
कि कोई व्यक्ति किसी को कितना पीट सकता है
सामर्थ्य यह प्रकट करता है
कि कोई व्यक्ति कितना सह सकता है


शक्ति जहाँ आक्रामकता है
सामर्थ्य वहा सहिष्णुता है
शक्ति करती जहाँ युध्द क्रीड़ा है
सामर्थ्य में रहती भीतर की पीड़ा है
सागर की लहरे उठ कर ऊपर की लहराती है
तूफान के भीतर सुनामी ले आती है
तब वह शक्ति की अभिव्यक्ति करती
प्रलय मचाती है

सामर्थ्य वह है

जो सागर की गहराई में रहता है,

विशाल जल राशि को नापता है
पर्वतो की ऊंचाई और विशालता है
जिसकी  विराटता को देख हृदय काँपता है
सामर्थ्य जहा धारण करने की क्षमता है
शक्ति वही मारण का कारण है
सामर्थ्यशाली व्यक्ति की क्षमता
सदा होती असाधारण है

सामर्थ्य आकाश है

जहाँ कई आकाश गंगाएँ रहा करती है
सामर्थ्य शिव है जिनकी जटा से माँ गंगा ही नहीं
पसीने से रेवा बहा करती है

सामर्थ्य वह धैर्य है

जो संकल्प में पला करता है
संकल्प का बल पा सामर्थ्य सदा भला करता है
व्यक्ति वही महान है जो सामर्थ्यशाली है
सामर्थ्यवान व्यक्ति की झोली कभी नहीं होती खाली है

 

 

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Ati sundar abhivyati ka ahsaas
    Rachana khoobsoorat aur khaas….!
    Commends

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