« »

राज खज़ाने के चोरी में शामिल ख़ुद था राजा भी।

2 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

शुरू शुरू में लगा ज़रा भी नहीं हमें अंदाज़ा भी।
राज खज़ाने के चोरी में शामिल ख़ुद था राजा भी।

हम तो पट खुलने की करते रहे प्रतीक्षा पंगत में,
उस्तादों ने ढूंढ़ रखा था उधर चोर दरवाज़ा भी।

भगवद् भजन नहीं सुनना था, सुननी ठकुरसुहाती थी
हमसे हुआ न ये तो फेंका बाहर पेटी बाजा भी।

नियम ज़ाब्ते की जो हमने बारंबार दुहाई दी
हमको पड़ा भुगतना उसका बहरहाल ख़मियाजा भी।

उमर बिता दी आँख जमाये पलक बिछाये राहों में
टूट रही उम्मीद मिलन की ज़ालिम अब तो आ जा भी।

3 Comments

  1. Ajay says:

    nice poem, plz read and review my poems at http://www.saavan.in/ajay

  2. Vishvnand says:

    Vaah vaah Badhiyaa …! 😉

Leave a Reply


Fatal error: Exception thrown without a stack frame in Unknown on line 0