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तबीयत बड़ी आज ‘डल’ हो रही है।

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Hindi Poetry

पहल दर पहल दर पहल हो रही है।
न क्यों ज़िन्दगी फिर सहल हो रही है।
जो मुमकिन हो सरकार आ जाइये ना
तबीयत बड़ी आज ‘डल’ हो रही है।
नदारद रहा हो सुकूं चैन सारा
रक़ीबों की साजिश सफल हो रही है।
वही के वही सारे मंजर लगे हैं
वो कहते थे रद्दो बदल हो रही है।
भरी जा रही मांग है ख़ूने दिल से
चलो अब सुहागिन ग़ज़ल हो रही है।

3 Comments

  1. Reetesh Sabr says:

    जो मुमकिन हो सरकार आ जाइये ना
    तबीयत बड़ी आज ‘डल’ हो रही है।

    डल होती तबियत को खिला दिया आपने…

  2. Vishvnand says:

    Vaah, bahut badhiyaa ….! 🙂

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