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माँ मित्र दे और प्यार दे

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Hindi Poetry
माँ शारदे तू तार दे
जीवन मेरा संवार दे 
हुआ विषम कठिन जीवन 
 नवीन सृजन विचार दे
 
बढे चरण बढे चरण 
सदा मेरे बढे चरण 
है कामना  यही मेरी
 विमल मति तेरी शरण
तू दे कला ,माँ वत्सला 
और लेखनी को धार दे 
 
सरल तरल कमल नयन
 हो हंस सा धवल हो मन 
सृजन फसल का अंकुरण
 रहे गति ,नहीं क्षरण 
हो शत्रुता कही नहीं 
माँ मित्र दे और प्यार दे

One Comment

  1. kusumgokarn says:

    Very nicely written for Vasant Panchami.
    Shubh kamanayen.
    Kusum

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