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बेवजह ही तीर सा दिल में चुभाया आपने (गीतिका)

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Hindi Poetry

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बेवजह ही तीर सा दिल में चुभाया आपने,
आज फिर बिन बात ही हमको रुलाया आपने ।
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ख्वाब था गहरा बहुत यूँ तोड़ आखिर क्या मिला,
नींद से क्या सोच कर हमको जगाया आपने ।
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उम्र भर तो प्यार का चुल्लू दिखा रिसता हुआ,
वाह ! कितने प्यार से रिश्ता निभाया आपने ।
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देवता थे हम कभी पर मंदिरों में थाप कर,
जागते इंसान को पत्थर बनाया आपने ।
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धूल झौंकी फिर कहा, मल दूँ जरा आ आँख को,
इस बहाने नैन से काजल चुराया आपने ।

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हरीश चन्द्र लोहुमी,लखनऊ, (उ॰प्र॰)
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One Comment

  1. sudha says:

    उम्दा !! बेहद उम्दा!!

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