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हर सहर का …

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Hindi Poetry

हर सहर का …

हर सहर का आगाज़ समझ सकता है
…हर शब का अन्दाज़ समझ सकता है
…….खुद को समझ ले इंसान ग़र जहां में
………….ज़िंदगी का हर राज़ समझ सकता है

सुशील सरना

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