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ख़मोशी जान खाये है चलो कुछ बात करते हैं

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Hindi Poetry

ख़मोशी जान खाये है चलो कुछ बात करते हैं
विवश कहने को कुछ तुमको न क्या जज्बात करते हैं

न रोटी रोज़गारी तो कहीं हमको नज़र आई
महज़ वादों की वो मुद्दत से बस बरसात करते हैं

बज़ा है कुछ न बोलो तुम ख़िरदवालों की महफिल में
तुम्हारे लफ्ज जाहिर ख़ामख़ा औक़ात करते हैं khirad vale-buddhiman

ज़माना वो है जब मतलब उसूले अव्वलीं ठहरा
बराये मस्लहत ही पेश सब सौग़ात करते हैं………usoole avvaleen-first principle,maslahat-vested interest

हुई मुद्दत तुम्हारी सूरते गुलनार को देखे
तुम्हारा इन्तज़ार आओ भी, हम दिन रात करते है

2 Comments

  1. Reetesh Sabr says:

    ज़माना वो है जब मतलब उसूले अव्वलीं ठहरा
    बराये मस्लहत ही पेश सब सौग़ात करते हैं….वाह!!!

  2. rajendra sharma "vivek" says:

    बेहतरीन

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