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इक दिन

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Hindi Poetry

इक दिन सबको जाना है
ये ज़िन्दगी बस एक बहाना है
किस बात का गुरूर करता हूँ मै
कहीं और मेरा ठिकाना है

ज़िन्दगी का पहिया हमें चलाना है
जीते जी ही कुछ करजाना है
ना राम बचे ना कृष्णा रहे
हमें भी अपना नाम कमाना है

इंसानियत का नाम आगे बढ़ाना है
इन्सान बनके फिर दिखाना है
बिखर गए जो ज़िन्दगी के पत्ते
एक बार फिर उन्हें जमाना है

मन की शक्ति को फिर जगाना है
दया की आग को अब जलाना है
बन के दिखाऊं एक नेक इंसान
इस ओर अब कदम बढ़ाना है

इक दिन सबको जाना है

4 Comments

  1. kusum says:

    Good thoughts ,very elevating.
    Daya ki aag ko ab jalana hai sounds bit harsh.
    Daya ke phool barsaana hai would be a better choice.
    Kusum

  2. Vishvnand says:

    (Y) Vaah Vaah, bahut badhiyaa ….!

    itanaa saaraa jo karanaa hai,
    ik jindagii me kahaan pooraa honaa hai
    iseeliye shayad hame jaakar yahaan phir se aanaa hai
    Mukti ke liye prabhu ke charano samarpan honaa hai ….! 🙂

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