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चंचल से दो व्याकुल नयना …

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Hindi Poetry

चंचल से दो व्याकुल नयना …

चंचल से दो व्याकुल नयना नीर छुपा न पाएं
पी विछोह के तड़पन की वो पीर छुपा न पाएं
ढाई आखर के प्रेमपाश में नैनों नें नींद गंवाई
मन के रांझे से हम मन की हीर छुपा ने पाएं

सुशील सरना

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