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क्या हुआ क्यों हाथ काँपे आप के

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Hindi Poetry

वार ये भी आप का खाली गया
क्या हुआ क्यों हाथ काँपे आप के

हो रहा तबदील है माहौल भी
पैंतरे पलटे यहाँ पे आप के

उनसे आगे जा रहा है कारवाँ
रास्ते जो जो थे नापे आप के

हैं हवायें तेज़ अब ऐसा न हो
खोल जायें पाप ढाँपे आप के

दर्द का जैसे उड़ाते हैं मज़ाक
दूरदर्शन पर सियापे आप के

भाप ज़्यादा कम है पानी पात्र में
सत्य सबने मित्र भाँपे आप के

2 Comments

  1. sushil sarna says:

    उनसे आगे जा रहा है कारवाँ
    रास्ते जो जो थे नापे आप के…..waaaaaaaaah bahut hee khoobsoorat gazal bn pdee hai aadrneey singh saahib…haardik badhaaee sweekaar krain sir

  2. s .n singh says:

    dhanyavad sarna ji

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