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ज़रा फ़रियाद सुनियेगा

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Hindi Poetry

मैेहरबां दो घड़ी रुक कर ज़रा फ़रियाद सुनियेगा
न पहुँची आप की भेजी कभी इमदाद सुनियेगा
कभी सूखा सताता है कभी सैलाब आता है
निकलते बीज नकली हैं न मिलती खाद सुनियेगा
न रहते मास्टर अक्सर भसुर हैं ज्ञान के जो हैं
विषय का ज्ञान है ना ही पहाड़ा याद सुनियेगा
चिकित्सालय पे ताला है खुले मे मद्यशाला है
क़रम से आप के बच्चे हुये बरबाद सुनियेगा
बड़ी बेरोज़गारी है भयंकर क़र्जदारी है
नहीं अपनी खुशी से मर रहे अफ़राद सुनियेगा
कभी बाज़ार ठगता है कभी लुटते अदालत में
कभी क़ानून चूसे खून हो आज़ाद सुनियेगा

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Ati sundar rachanaa ,
    Sateek, arthpoorn bahu manbhaavan …!

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