« »

जमा हुये हैं फिर रैली में सारे मनसबदार सखे

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

जमा हुये हैं फिर रैली में सारे मनसबदार सखे
जैकारा कुर्सीदाता का करते बारम्बार सखे

फिर चुनाव का मौसम आया पदयात्री हैं सड़कों पर
लड़ते हैं लहरा लहरा कर भाषण की तलवार सखे

साम दाम ले दण्ड भेद ले जुटे पैंतरेबाज सभी
शर्त रहे बद कौन बनाता है अबकी सरकार सखे

कदाचार भी सदाचार है जब तक पकड़ा जाय नहीं
भेद नहीं जब तक खुलता है सारे इज्जतदार सखे

Leave a Reply


Fatal error: Exception thrown without a stack frame in Unknown on line 0