« »

ज़िन्दगी के गुल में निकहत से रहें

1 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

कब तलक डरते हक़ीक़त से रहें
बेबसो बेकल ज़रूरत से रहें

जिन्दगी जद्दोजहद ठहरी मगर
आइये लड़ते मुहब्बत से रहें

खून पीते रात दिन हालात हैं
आप कहते हैं शराफ़त से रहें

क्या ज़रुरी है नुमा़इश कीजिये
ज़िन्दगी के गुल में निकहत से रहें

One Comment

Leave a Reply