« »

और उनपे तैरते चिकने कई घड़े देखे

1 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

तरक्कियों के तो दावे बड़े बड़े देखे
मगर नतीज़े फ़क़त चन्द आँकड़े देखे

ये राजधानी है तालाब इक अजब ढब की
कि जिसके पंक मे सपने सुघड़ पड़े देखे

यहां की झील में कुर्सीनुमा मिलीं नावें
और उनपे तैरते चिकने कई घड़े देखे

सभी को रंज था हालात पर सियासत के
सभी थे देखते कौन इनसे अब लड़े देखें

Leave a Reply