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मुलाक़ात बनती है मेरी

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Hindi Poetry

एक तो मुलाक़ात बनती है मेरी
दे जा ये सौगात बनती है मेरी

कई दिनों से है सुना तू शहर में
फिर सनम इक रात बनती है मेरी

चाहतें मिलने की तुझ को कम नहीं
क्यों नहीं फिर बात बनती है मेरी

बारिशों का पूरा मौसम न सही
एक तो बरसात बनती है मेरी

हक़ फ़क़ीरों का है तेरी दीद पर
इतनी तो खैरात बनती है मेरी

-chandan

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Khuubsoorat manbhaavan andaazebayaan….
    Manbhaayaa …!

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