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उत्कर्ष का नहीं छोर है

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Hindi Poetry

मार्ग में संघर्ष है
संघर्ष के कई दौर है
संघर्ष में उत्कर्ष है
उत्कर्ष का नहीं छोर है
राह में कांटे बिछाये
मुश्किलें कितनी भी आये
मौत भी न जीत पाये
उम्मीदे कुछ और है

हर खुशी दुःख से बड़ी है
मुश्किलो से वह लड़ी है
लौट आओ उम्मीदे तुम
मंजिले चौखट खड़ी है
आज के भीतर रहा कल
अंकुरित बीज फिर बना फल
हर प्रतीक्षा है परीक्षा
यहाँ परीक्षा की झड़ी है

3 Comments

  1. kusum says:

    Very fine message for New Year.
    All the best.
    Kusum

  2. Vishvnand says:

    Atisundar abhivakti is rachanaa kii
    lagii bahut hii manbhaavan hai
    Nav varsh kii shubhkaamanaaon sahit
    aapko hardik badhaaii hai ….!

  3. pratikriyaa ke liye dhanyvaad

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