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मैं न था पत्थर मियाँ इंसान था

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Hindi Poetry

आप से मिल लूँ बड़ा अरमान था
आप से मिलना कहाँ आसान था

कुछ तो था जो थाम लेता था जुबां
चुप रहा मैं बेसबब ऐसा न था
बेसबब-without reason

होश बचता हुस्ने जानां देख कर?
मैं न था पत्थर मियाँ इंसान था

बदलियों के बीच से निकला था चाँद
हल्क़ये गेसू में वो चेहरा न था
हल्क़ये गेसू-circle of tresses,baalon ka ghera

हँस के पूछा नाम जो उसने मेरा
कौन हूँ मैं फिर किसे ये भान था

तुमसे उलझा और टूटा एक दिन
दिल ये नाज़ुक किस क़दर नादान था

रस्म अदाई थी गले मिलने में भी
यूँ लगा मेला अजीमुश्शान था
अजीमुश्शान -having great fanfare, badi shaan vala

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