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फिर जाने तुम कहाँ रहोगे कहाँ रहेंगे हम बाबा

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Hindi Poetry

जब तक बजती है बजने दो साँसों की सरगम बाबा
फिर जाने तुम कहाँ रहोगे कहाँ रहेंगे हम बाबा

ज़ख़्मी दिल पर ज़ख्म नया तुम और लगाने आये हो
मुमकिन हो तो रखना सीखो ज़ख्मों पर मरहम बाबा

चलते चलते इस जीवन की निसदिन आपा धापी में
थक जाओगे मेरी मानो ले लो कुछ दम दम बाबा

मुस्कानों के फूल न खिलते मन की सीली मिट्टी में
अक्सर बारिश ले आते हैं यादों के मौसम बाबा

क्यों आये कल भला किसी से नौबत आँख चुराने की
गुंजाइश ये लेन देन में रखना कम से कम बाबा

One Comment

  1. क्या बात है…! बहुत ही बढियां पंक्तियाँ..!

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