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नतीजे कुछ नहीं होने यहाँ आंसू बहाने के

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Hindi Poetry

बहाने ढूंढिए कोई यहाँ हंसने हंसाने के
नतीजे कुछ नहीं होने यहाँ आंसू बहाने के

जिन्हें खिदमत बजानी थी बने बैठे वही मालिक
हुकुम हर रोज़ देते हैं हमें खिदमत बजाने के

फ़लक़ को दे रहीं बोसे बुलंदी बिल्डिंगों की है
परिंदे ढूंढ के हैरां निशां हैं आशियाने के
bose-kiss

बुझाते तिश्नगी मटके थे जब गाँवों में रहते थे
न कूलर से भी तर होते हलक़ हैं अब ज़माने के
tishngi-thirst

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