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ग़ज़ल: पूछते हो क्या बताएं हम अभी

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Hindi Poetry

पूछते हो क्या बताएं हम अभी
वक़्त ने भर दिए हैं ज़ख्म अभी

जब लगेगी प्यास तो कह ही देंगे
पी रहे हैं बादा-ए-अश्क़ हम अभी

तुमको ही फिर बहलाना है यार दिल
सो गए फ़िलहाल बोझल ग़म अभी

कुछ दिनों में सर्द पत्थर होने हैं
बहते हैं जो जज़्बात के मौसम अभी

शायद तुम्हारी ही दुआ से हो फ़तेह
कमहुनर झुक गया है परचम अभी

जो तुम नहीं तो दर्द ने बैठा लिया
तुम कहो तो फिर चलें क़दम अभी

हम कहेंगे जब भी तो पूरी दास्ताँ
लग रहीं हैं उलझनें हमें कम अभी

रिश्ते-नाते ज़िन्दगी भर टूटें-बनें
कल न थे आंसू हैं आँखें नम अभी

~सब्र रीत

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