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दर्दे दिल बढ़ जाएगा बेकार में

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Hindi Poetry

कब तलक तड़पेंगे यूँ अँधियार में
एक दरीचा खोलिए दीवार में
बात जो राजा को गुज़रे नागवार
वो न करिये बैठ कर दरबार में
बाज़ुओं की नातवानी भूल कर
नुक्स बतलाये गए पतवार में
बेगुनाहों का पिया इतना लहू
अब न पानी तेग़े पानीदार में
हुं कहाँ से आएगी हुंकार में
अब हैं वो बैठे हुए सरकार में
बैठे फुटपाथों पे मिलते मालिकान
भरते फर्राटे हैं खादिम कार में
यूँ बरहना हुस्ने जानाना हुआ
अब कहाँ रोमानियत दीदार में
अश्क़बारी हाले बद पर मुल्क़ की
कर रहे हैं बैठ कर वो बार में
हैं तबीब अच्छे दिए तक़दीर ने
बदतरी बढ़ती गयी बीमार में
जिनको कल तक दे रहे थे गालियाँ
हो गए शामिल सभी परिवार में
अब भी ज़िंदा बच गया बीमारे ग़म
रह गई शायद कमी तीमार में
मर गए तुम एक ही दो वार में
क्या रही कीमत निगाहें यार में
बात गुज़रे वक़्त की मत कीजिये
दर्दे दिल बढ़ जाएगा बेकार में

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