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ये डे…छन्न डे..सन डे!!!

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Hindi Poetry

छन्न…छन्न..हो रहा है ये डे
सन पे सुकूँ के छींटे जो पड़े

हर डे पे खौलता चले जले वो
सन डे पे हौसला उसका बढ़े

बदली हो कोहरा हो मोहरा वो
सर्दियों, सावनों पे दोष न मढ़े

इधर दौड़ उधर भाग जहाँ जाग
टुडे सुस्ताए दम भर खड़े-खड़े

अख़बार पे छपा छुपा हुआ वार
संडे फुर्सत से दिलचस्पियाँ पढ़े

छन्न…छन्न..हो रहा है ये डे
सन पे सुकूँ के छींटे जो पड़े!!!

~सब्र रीत ©

4 Comments

  1. Jeetesh V. says:

    बहुत अच्छी रचना हैं मित्रा…बधाई हो!

  2. Reetesh Sabr says:

    धन्यवाद मित्रा…बाक़ायदा यहाँ भी आ के पढ़ने और सराहने की ज़हमत उठाई! अब जब कविताओं का से पता-ठिकाना देख ही लिया है तो समय-सुविधानुसार शेष संग्रह का भी अवलोकन करने का विनम्र आग्रह प्रस्तुत है…

    आभार सहित

    रीतेश

  3. Raj says:

    Good one.

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