« »

मिला करते तो, मेरी, जान तुम भी खूबियां जाते।

1 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

छिपा कर मुंह अगर हमसे न ऐसे मेहरबां जाते
तुम्हें क्या रोक लेते हम,जहाँ जाते वहां जाते।

तुम्हारे साथ चलते तो कोई मंज़िल मिली होती
सफर इक उम्र के अपने न ऐसे रायगाँ जाते।

ज़रा खुल कर दिलों की बात आपस में जो कह लेते
वहम के जो घने बादल घिरे हैं दरमियां,जाते।

तुम्हारे हुस्न के हम तो हैं क़ायल इक ज़माने से
मिला करते तो, मेरी, जान तुम भी खूबियां जाते।

परिंदे हैं इन्हे तूफां से घबराना नहीं आता
बड़े बेफ़िक्र होकर फिर बनाने आशियाँ जाते।

सही है या गलत रस्ता, इसे खुद तय करेंगे वो,
कि जिस पर सर उठाये शान से हैं नौजवां जाते।

One Comment

  1. Vishvnand says:

    Beautiful poem, delighting rhythm
    commends

Leave a Reply


Fatal error: Exception thrown without a stack frame in Unknown on line 0