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ज़िन्दगी सबकी हुई क्यों हादिसों की फ़र्द है

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Hindi Poetry

दर्द तेरा हो कि मेरा, दर्द आख़िर दर्द है
ज़िन्दगी सबकी हुई क्यों हादिसों की फ़र्द है fard-description

आदमी आख़िर बताओ किस लिए मग़रूर है
है वजूद इसका बस इतना गर्दिशों में गर्द है gardish-revolving in the orbit

आईना होना यहाँ पर हो गया संगीं गुनाह
या तो चेहरा स्याहरु है या तो चेहरा ज़र्द है syahru-blackened face,zard-pale

एक अबला को मसलना क्या यही ज़ोरावरी
ये तो क्या मर्दानगी है आप कैसे मर्द हैं zoravari-show of strength

क्या करें ठंडी न होती दिल की कैसे भी तपिश
अश्क भी हैं बेअसर, नाक़ाम आहे सर्द है

One Comment

  1. Vishvnand says:

    vaah, manbhaavan composition
    commends

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