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तुम्हारे असमंजस से मरा हूँ मैं

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Hindi Poetry

१.
जब तुम अपने घरों में बंद
देख रहे होते थे बड़ी जगमगाती स्क्रीनों पे
खबर मेरे घरों पे गिरते बमों की
और कर रहे थे तय कौन सही है कौन गलत –
किसकी भर्त्सना करनी है और किसको सही ठहराना है.
तब उनके बारूद से ज्यादा – तुम्हारे असमंजस से मरा हूँ मैं.

२.
मेरे युद्ध में दो पक्ष होते हैं,
दो सेनाएं होती हैं,
बंदूकें, टैंक और तोपों की नालें
दोतरफ़ा होती हैं.
लड़ाकू जहाजों की उड़ान
दो दिशाओं में होती है.

तुम्हारा युद्ध कुछ और ही है.

३.
तुम जीतना,  इतिहास लिखना।
नुक्कड़ वाले बुड्ढे को आतंकी
स्कूल जाती बच्ची को हत्यारी
कंचे खेलते बच्चों को आत्मघाती दस्ता बताना.

मरे हुए लोग तर्क नहीं करते.

४.
तुम इजरायली हो,
तुम अमरीकी हो,
तुम पलीस्तीनी हो,
तुम हमास हो,
तुम संयुक्त राष्ट्र संघ हो,

मेरा बच्चा, मेरा बच्चा था.

५.
तुम तेल के लिए लड़ते हो
तुम जमीन के लिए लड़ते हो
तुम सुरंगों के लिए लड़ते हो
तुम हथियारों के लिए लड़ते हो
तुम प्रभुत्व के लिए लड़ते हो

तुम्हारी लड़ाई में वो भी मरा
जो होमवर्क नहीं करने के लिए लड़ता था.

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    Vaah Vaah, Kyaa bat hai,
    Alag sii, bahut sundar, badhiyaa, arthpoorn aur maarmik
    Hearty Kudos ….!

  2. Suresh Dangi says:

    Beautiful creation with heart piercing Messages !!! Congrats !!!

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